इस लड़की की उम्र है सिर्फ 25 साल, लेकिन इनकी कंपनी की नेट वर्थ 15 करोड़

भारत में जब से BJP की सरकार बनी है तब से स्टार्टअप का बोलबाला चारों तरफ है | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिजनेस के ऊपर खासा जोर दिया है इसी वजह से आज हिंदुस्तान में हर रोज सैकड़ों स्टार्टअप खड़े हो रहे हैं और जहां देखो सिर्फ बिजनेस की बातें हो रही हैं, यह भारत की इकॉनॉमी इकॉनॉमी के लिए अच्छा भी है | अब हम जॉब क्रिकेटर बनने लगे हैं, इसी बीच साल 2015 में भी एक स्टार्टअप की शुरुआत हुई जिस की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं 

भारत में शॉपिंग के बदलते ट्रेंड के बावजूद लोगों का पहले से मौजूद दुकानों के प्रति लगाव को देखते हुए संभवी सिन्‍हा को एक बिजनेस आइडिया आया | एक ऐसा बिजनेस करने का आईडिया जिसमें ऑनलाइन प्लेटफार्म है जहां पर प्रोडक्ट की बुकिंग तो हो लेकिन डिलीवरी कस्टमर अपने नजदीकी दुकान से ख़ुद विजिट करके ले सके | संभवी सिन्हा ने शॉपमेट नाम से एक ऐसे ही ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म की शुरुआत साल 2015 में की | इस शॉपिंग वेबसाइट से आप किसी भी प्रोडक्ट को ऑनलाइन बेस्ट प्राइस में डील कर सकते हैं उसके बाद उस प्रोडक्ट की डिलीवरी अपनी नजदीकी दुकान से ले सकते हैं और इन सब के लिए संभवी ने दिसंबर 2015 में शॉपमेट प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी खोली | इस वक्त कंपनी में कुछ लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है |

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संभवी सिन्‍हा ने बताया कि दिसंबर, 2015 में हमने इस कंपनी की शुरुआत 1 करोड़ रुपए से की थी। उन्‍होंने बताया कि इस ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म को शुरू करने के लिए हमने अपने पैरेंट्स और कुछ दोस्‍तों से मदद भी ली थी। संभवी ने बताया कि शॉपमेट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का कुल ऐसेट्स करीब 15 करोड़ रुपए है। उन्‍होंने बताया कि कंपनी की सालाना इनकम 80 लाख रुपए है।

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25 साल की कॉमर्स ग्रेजुएट संभवी सिन्‍हा ने अमेरिका से पढ़ाई करके लौटने पर ऑनलाइन शॉपिंग की दुनिया में अलग तरह से काम करने का रास्‍ता चुना। ऑनलाइन शॉपिंग बाजार में बड़ा रिस्‍क लेते हुए शॉपमेट नाम से एक कंपनी खोली, जिसके ऑनलाइन प्‍लेटफार्म पर इलेक्‍ट्रॉनिक, आईटी, बाइक और कार आदि की बुकिंग होती है, जिससे प्रोडक्‍ट्स को खरीदने और बेचने वाले दोनों को फायदा होता है। कस्‍टमर किसी प्रोडक्‍ट्स को ऑनलाइन बेस्‍ट डील पर इस प्‍लेटफॉर्म के जरिए ऑफलाइन (पास की दुकान से) खरीदता है। आमतौर पर किसी प्रोडक्‍ट्स की ऑनलाइन शॉपिंग करने पर डिलेवरी कंपनियां घर पर करती है, जिसमें समान के खराब होने पर रिटर्न ओर रिप्‍लेस करने का झंझट होता है। लेकिन आप शॉपमेट के जरिए खरीददारी करके अपने पास की दुकान से समान की डिलेवरी ले सकते हैं। इससे कस्‍टमर को किसी प्रोडक्‍ट्स को ऑनलाइन मोलभाव करने का मौका मिलता है, जिससे उसे बेस्‍ट प्राइस मिलता है। शॉपमेट को एक से दो फीसदी कमीशन मिलता है

सांभवी सिन्‍हा ने बताया कि इस काम में हमारी कंपनी शॉपमेट को 1-2 फीसदी का कमीशन मिलता है। साथ ही हमारे साथ 8-10 इम्‍प्‍लॉइज भी काम कर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि अभी हमारी कंपनी दिल्‍ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में काम कर रही है। और इसका आने वाले समय अन्‍य शहरों में एक्‍सपेंशन किया जाएगा। शॉपमेट की सीईओ सांभवी सिन्‍हा ने बताया कि आप हमारी कंपनी के जरिए टूव्‍हीलर, फोर व्‍हीलर से लेकर कोई भी इलेक्‍ट्रॉनिक आइटम्स जैसे Mobile, लैपटॉप, टीवी, फ्रीज, वाशिंग मशीन की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। इससे कस्‍टमर को अपनी पसंद का कोई भी समान बेहतर प्राइस में अपने पास की दुकान से मिल जाता है। सांभवी ने बताया कि किसी प्रोडक्‍टस की खररीदादारी कोई भी कस्‍टमर कंपनी की वेबसाइट पर जाकर कर सकता है। शॉपमेट की ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्‍ध किसी भी प्रोडक्‍टस जैसे बाइक, टूव्‍हीलर, इलेक्‍ट्रॉनिक आइटम्‍स और मोबाइल आदि की ऑनलाइन बेस्‍ट प्राइस डील कर बुक कर सकते हैं, जिसकी डिलेवरी नजदीक की दुकान से आपको मिल जाएगी।

भारत में बना था दुनिया का पहला हवाई जहाज (Proof Includes)

भारत में बना था दुनिया का पहला हवाई जहाज

अगर किसी से हम पूछे कि दुनिया का पहला हवाई जहाज किसने बनाया तो सिर्फ एक नाम सामने आता है, राइट ब्रदर | इन्होने अमेरिका के कैरोलिन तट पर 17 दिसंबर 1903 को यह आविष्कार किया | इन्होंने पहला हवाई जहाज बनाकर उड़ाया जो 120 फीट उड़ा और फिर गिर गया, इसके बाद हवाई जहाज की कहानी शुरू होती है तो हम बचपन से यह पढ़ते आए हैं कि 17 दिसंबर 1903 को पहली बार संसार का पहला जहाज बना और उड़ा |

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who made world's first airplane

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लेकिन भारत में मिले दस्तावेज यह बताते हैं कि 1903 से कई साल पहले विक्रम संवत 1895 में हमारे देश (भारत) ने बहुत बडा विमान बनाया तथा उसे मुंबई की चौपाटी के समुद्र तट पर उड़ाया, यह हवाई जहाज 1500 फिट ऊपर उड़ा और फिर नीचे गिर गया | जिस भारतीय वैज्ञानिक ने यह करिश्मा किया उसका नाम था शिवकर बापूजी तलपडे| शिवकर एक मराठा थे वह मुंबई चीरा बाजार के रहने वाले थे| वह संस्कृत शास्त्रों का अध्ययन करते थे इनकी रुचि महर्षि भारद्वाज द्वारा लिखे विमान शास्त्र में हो गई उन्होंने दुनिया की पहली विमान शास्त्र पुस्तक लिखी थी, इस पुस्तक के आधार पर बहुत सारे पुस्तक लिखी गई हैं| महर्षि भारद्वाज की विमान शास्त्र लगभग 1500 पुरानी है |

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शिवकर जी इस पुस्तक के ऊपर पूरा शोध करके कुछ रोचक बातें कहीं, उनका कहना था कि इस पुस्तक के 8 अध्यायो में विमान बनाने की तकनीक का विस्तार से वर्णन किया गया है | शिवकर जी बापू का कहना था कि 8 अध्यायों में 100 खंड है जिनमें विमान बनाने की तकनीक का विस्तार से वर्णन है| महर्षि भारद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक में विमान बनाने की 500 सिद्धांत लिखें है |

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नोट : एक सिद्धांत पर पूरा विमान बनाया जा सकता है

अर्थात 500 प्रकार के विमान बनाए जा सकते हैं, हर एक सिद्धांत पर एक विमान बनाया जा सकता है | विमान शास्त्र में इन 500 सिद्धांतों के 3000 श्लोक हैं और महर्षि भारद्वाज ने बताया कि 500 सिद्धांतों से 32 प्रकार से विमान बनाया जा सकता है अर्थात एक विमान बनाने के 32 तरीके हैं |

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इस पूरी पुस्तक को पढ़कर तथा शोध करके शिवकर जी ने बार-बार विमान बनाने की कोशिश की और 1895 में सफलता हासिल की | शिवकर जी ने 1895 में विमान बनाकर उड़ाया भी और उसे देखने के लिए बड़े-बड़े लोग आए थे | इनमें से महादेव गोविंद रानाडे जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था के सबसे बड़े जज थे, जो कि मुंबई हाईकोर्ट में थे | उसी समय वडोदरा के राजा गायकवाड भी गए थे, इस तरह बहुत सारे लोग गए थे हजारों लोगों की उपस्थिति में शिवकर जी ने अपना विमान उड़ाया था | इस खुशी में राजा गायकवाड जी ने उन्हें जागीर इनाम में देने की घोषणा की थी तब शिवकर जी ने कहा कि मुझे विमान बनाने के लिए पैसों की जरूरत है|  उस वक्त लोगों ने इस धन का ढेर लगा दिया था |

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अंग्रेजों ने दिया धोखा

यह वह दौर था जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था उस वक्त अंग्रेजों की एक कंपनी थी जिसका नाम था रैली ब्रदर्स था| उस कंपनी के कुछ लोग शिवकर जी के पास आए और बोले कि हम आपकी मदद करना चाहते हैं, हम आप का आविष्कार पूरी दुनिया के सामने लाना चाहते हैं इसलिए आप हमें अपने शोध वाली पुस्तक और विमान का डिजाइन हमें दे दीजिए| आपके पास पैसों की कमी है इसलिए आप हमारे साथ समझौता कर लीजिए | शिवकर जी सीधे – साधे भोले इंसान थे इसलिए उनकी बातों में आ गए और उन्होंने समझौता कर लिया |

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यह कंपनी शिवकर जी से विमान का पूरा मोडल, डिज़ाइन, चित्र, आदि लेकर लन्दन चली गई | लन्दन जाने के बाद यह है दस्तावेज राइट ब्रदर्स के हाथ लग गए और 1903 में उन्होंने यह आविष्कार अपने नाम दर्ज करवा लिया और इसी बीच शिवकर जी की मृत्यु हो गई कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि अंग्रेजी शासन ने शिवकर जी की हत्या कर दी थी |

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Credit : Written by Manish Banaa

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