पॉलिथीन का आविष्कार व शुरुआत कैसे हुई !

नमस्कार दोस्तों एजुकेशन हाउस में आपका स्वागत है, आज मैं आपके लिए एक बढ़िया जानकारी लेकर आया हूं |आज के इस आर्टिकल में आपको बताऊंगा कि पॉलिथीन की शुरुआत कैसे हुई | जिस पॉलिथीन का उपयोग हम हर रोज करते हैं, दैनिक कार्यो को पूरा करने के लिए एक औसत व्यक्ति दिन में कम से कम तीन बार पॉलिथीन का इस्तेमाल करता है |

भारत में बना था दुनिया का पहला हवाई जहाज (Proof Includes)

polythene bag

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दोस्तों पॉलिथीन हमारे पर्यावरण के लिए खतरा भी है, लेकिन आज का आर्टिकल के अंदर हम बात करेंगे कि पॉलिथीन की शुरुआत कैसे हुई | पॉलिथीन में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक इसमें जिसको पॉलिथालीन भी कहा जाता है | पॉलिथीन दुनिया का सबसे लोकप्रिय प्लास्टिक है,पॉलीथिन सबसे पहले जर्मनी के मिस्ट हैंस वोन पैचमान ने सन 1898 में अचानक खोज लिया था |

पटाखों का आविष्कार कब, कहां और कैसे हुआ!

उन्होंने प्रयोग करते वक्त सफेद रंग के मोम जैसे पदार्थ को बनते देखा और उसका नाम पॉलिथीन रखा | औद्योगिक रूप से पॉलिथीन का आविष्कार 1935 में नॉर्थ बीच इंग्लैंड एरिक फ़ोसेट औररेगिनाल्ड गिबसन से एक एक्सीडेंट में हो गया |

इस एक्सीडेंट रुपी प्रयोग को दोबारा करना मुश्किल था. पर 1935 में इसे भलीभांति कर लिया गया | दरअसल एथिलीन और बेजलडीहाइड के मिश्रण पर बहुत भारी प्रेशर डालना था | जिसे यह पदार्थ बनता था | आज यह तकनीक समाने हो गई है और पूरी दुनिया में इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है |

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लेकिन दोस्तों हमें इसका इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए ताकि हम पर्यावरण को होने वाले इसके नुकसान से बचा सके | दोस्तों अब आप समझ गए होंगे कि पॉलिथीन का आविष्कार किस प्रकार से हुआ और इसे कैसे बनाया जाता है | तो मैं उम्मीद करता हूं कि आपको आर्टिकलअच्छा लगा होगा तो इसे लाइक और शेयर कर दीजिए |इस से भी बढ़िया एजुकेशनल आर्टिकल के लिए अभी एजुकेशन हाउस को फॉलो करें

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भारत में जब से BJP की सरकार बनी है तब से स्टार्टअप का बोलबाला चारों तरफ है | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिजनेस के ऊपर खासा जोर दिया है इसी वजह से आज हिंदुस्तान में हर रोज सैकड़ों स्टार्टअप खड़े हो रहे हैं और जहां देखो सिर्फ बिजनेस की बातें हो रही हैं, यह भारत की इकॉनॉमी इकॉनॉमी के लिए अच्छा भी है | अब हम जॉब क्रिकेटर बनने लगे हैं, इसी बीच साल 2015 में भी एक स्टार्टअप की शुरुआत हुई जिस की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं 

भारत में शॉपिंग के बदलते ट्रेंड के बावजूद लोगों का पहले से मौजूद दुकानों के प्रति लगाव को देखते हुए संभवी सिन्‍हा को एक बिजनेस आइडिया आया | एक ऐसा बिजनेस करने का आईडिया जिसमें ऑनलाइन प्लेटफार्म है जहां पर प्रोडक्ट की बुकिंग तो हो लेकिन डिलीवरी कस्टमर अपने नजदीकी दुकान से ख़ुद विजिट करके ले सके | संभवी सिन्हा ने शॉपमेट नाम से एक ऐसे ही ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म की शुरुआत साल 2015 में की | इस शॉपिंग वेबसाइट से आप किसी भी प्रोडक्ट को ऑनलाइन बेस्ट प्राइस में डील कर सकते हैं उसके बाद उस प्रोडक्ट की डिलीवरी अपनी नजदीकी दुकान से ले सकते हैं और इन सब के लिए संभवी ने दिसंबर 2015 में शॉपमेट प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी खोली | इस वक्त कंपनी में कुछ लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है |

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संभवी सिन्‍हा ने बताया कि दिसंबर, 2015 में हमने इस कंपनी की शुरुआत 1 करोड़ रुपए से की थी। उन्‍होंने बताया कि इस ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म को शुरू करने के लिए हमने अपने पैरेंट्स और कुछ दोस्‍तों से मदद भी ली थी। संभवी ने बताया कि शॉपमेट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का कुल ऐसेट्स करीब 15 करोड़ रुपए है। उन्‍होंने बताया कि कंपनी की सालाना इनकम 80 लाख रुपए है।

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25 साल की कॉमर्स ग्रेजुएट संभवी सिन्‍हा ने अमेरिका से पढ़ाई करके लौटने पर ऑनलाइन शॉपिंग की दुनिया में अलग तरह से काम करने का रास्‍ता चुना। ऑनलाइन शॉपिंग बाजार में बड़ा रिस्‍क लेते हुए शॉपमेट नाम से एक कंपनी खोली, जिसके ऑनलाइन प्‍लेटफार्म पर इलेक्‍ट्रॉनिक, आईटी, बाइक और कार आदि की बुकिंग होती है, जिससे प्रोडक्‍ट्स को खरीदने और बेचने वाले दोनों को फायदा होता है। कस्‍टमर किसी प्रोडक्‍ट्स को ऑनलाइन बेस्‍ट डील पर इस प्‍लेटफॉर्म के जरिए ऑफलाइन (पास की दुकान से) खरीदता है। आमतौर पर किसी प्रोडक्‍ट्स की ऑनलाइन शॉपिंग करने पर डिलेवरी कंपनियां घर पर करती है, जिसमें समान के खराब होने पर रिटर्न ओर रिप्‍लेस करने का झंझट होता है। लेकिन आप शॉपमेट के जरिए खरीददारी करके अपने पास की दुकान से समान की डिलेवरी ले सकते हैं। इससे कस्‍टमर को किसी प्रोडक्‍ट्स को ऑनलाइन मोलभाव करने का मौका मिलता है, जिससे उसे बेस्‍ट प्राइस मिलता है। शॉपमेट को एक से दो फीसदी कमीशन मिलता है

सांभवी सिन्‍हा ने बताया कि इस काम में हमारी कंपनी शॉपमेट को 1-2 फीसदी का कमीशन मिलता है। साथ ही हमारे साथ 8-10 इम्‍प्‍लॉइज भी काम कर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि अभी हमारी कंपनी दिल्‍ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में काम कर रही है। और इसका आने वाले समय अन्‍य शहरों में एक्‍सपेंशन किया जाएगा। शॉपमेट की सीईओ सांभवी सिन्‍हा ने बताया कि आप हमारी कंपनी के जरिए टूव्‍हीलर, फोर व्‍हीलर से लेकर कोई भी इलेक्‍ट्रॉनिक आइटम्स जैसे Mobile, लैपटॉप, टीवी, फ्रीज, वाशिंग मशीन की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। इससे कस्‍टमर को अपनी पसंद का कोई भी समान बेहतर प्राइस में अपने पास की दुकान से मिल जाता है। सांभवी ने बताया कि किसी प्रोडक्‍टस की खररीदादारी कोई भी कस्‍टमर कंपनी की वेबसाइट पर जाकर कर सकता है। शॉपमेट की ऑफिशियल वेबसाइट पर उपलब्‍ध किसी भी प्रोडक्‍टस जैसे बाइक, टूव्‍हीलर, इलेक्‍ट्रॉनिक आइटम्‍स और मोबाइल आदि की ऑनलाइन बेस्‍ट प्राइस डील कर बुक कर सकते हैं, जिसकी डिलेवरी नजदीक की दुकान से आपको मिल जाएगी।

भारत में बना था दुनिया का पहला हवाई जहाज (Proof Includes)

भारत में बना था दुनिया का पहला हवाई जहाज

अगर किसी से हम पूछे कि दुनिया का पहला हवाई जहाज किसने बनाया तो सिर्फ एक नाम सामने आता है, राइट ब्रदर | इन्होने अमेरिका के कैरोलिन तट पर 17 दिसंबर 1903 को यह आविष्कार किया | इन्होंने पहला हवाई जहाज बनाकर उड़ाया जो 120 फीट उड़ा और फिर गिर गया, इसके बाद हवाई जहाज की कहानी शुरू होती है तो हम बचपन से यह पढ़ते आए हैं कि 17 दिसंबर 1903 को पहली बार संसार का पहला जहाज बना और उड़ा |

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who made world's first airplane

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लेकिन भारत में मिले दस्तावेज यह बताते हैं कि 1903 से कई साल पहले विक्रम संवत 1895 में हमारे देश (भारत) ने बहुत बडा विमान बनाया तथा उसे मुंबई की चौपाटी के समुद्र तट पर उड़ाया, यह हवाई जहाज 1500 फिट ऊपर उड़ा और फिर नीचे गिर गया | जिस भारतीय वैज्ञानिक ने यह करिश्मा किया उसका नाम था शिवकर बापूजी तलपडे| शिवकर एक मराठा थे वह मुंबई चीरा बाजार के रहने वाले थे| वह संस्कृत शास्त्रों का अध्ययन करते थे इनकी रुचि महर्षि भारद्वाज द्वारा लिखे विमान शास्त्र में हो गई उन्होंने दुनिया की पहली विमान शास्त्र पुस्तक लिखी थी, इस पुस्तक के आधार पर बहुत सारे पुस्तक लिखी गई हैं| महर्षि भारद्वाज की विमान शास्त्र लगभग 1500 पुरानी है |

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शिवकर जी इस पुस्तक के ऊपर पूरा शोध करके कुछ रोचक बातें कहीं, उनका कहना था कि इस पुस्तक के 8 अध्यायो में विमान बनाने की तकनीक का विस्तार से वर्णन किया गया है | शिवकर जी बापू का कहना था कि 8 अध्यायों में 100 खंड है जिनमें विमान बनाने की तकनीक का विस्तार से वर्णन है| महर्षि भारद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक में विमान बनाने की 500 सिद्धांत लिखें है |

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नोट : एक सिद्धांत पर पूरा विमान बनाया जा सकता है

अर्थात 500 प्रकार के विमान बनाए जा सकते हैं, हर एक सिद्धांत पर एक विमान बनाया जा सकता है | विमान शास्त्र में इन 500 सिद्धांतों के 3000 श्लोक हैं और महर्षि भारद्वाज ने बताया कि 500 सिद्धांतों से 32 प्रकार से विमान बनाया जा सकता है अर्थात एक विमान बनाने के 32 तरीके हैं |

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इस पूरी पुस्तक को पढ़कर तथा शोध करके शिवकर जी ने बार-बार विमान बनाने की कोशिश की और 1895 में सफलता हासिल की | शिवकर जी ने 1895 में विमान बनाकर उड़ाया भी और उसे देखने के लिए बड़े-बड़े लोग आए थे | इनमें से महादेव गोविंद रानाडे जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था के सबसे बड़े जज थे, जो कि मुंबई हाईकोर्ट में थे | उसी समय वडोदरा के राजा गायकवाड भी गए थे, इस तरह बहुत सारे लोग गए थे हजारों लोगों की उपस्थिति में शिवकर जी ने अपना विमान उड़ाया था | इस खुशी में राजा गायकवाड जी ने उन्हें जागीर इनाम में देने की घोषणा की थी तब शिवकर जी ने कहा कि मुझे विमान बनाने के लिए पैसों की जरूरत है|  उस वक्त लोगों ने इस धन का ढेर लगा दिया था |

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अंग्रेजों ने दिया धोखा

यह वह दौर था जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था उस वक्त अंग्रेजों की एक कंपनी थी जिसका नाम था रैली ब्रदर्स था| उस कंपनी के कुछ लोग शिवकर जी के पास आए और बोले कि हम आपकी मदद करना चाहते हैं, हम आप का आविष्कार पूरी दुनिया के सामने लाना चाहते हैं इसलिए आप हमें अपने शोध वाली पुस्तक और विमान का डिजाइन हमें दे दीजिए| आपके पास पैसों की कमी है इसलिए आप हमारे साथ समझौता कर लीजिए | शिवकर जी सीधे – साधे भोले इंसान थे इसलिए उनकी बातों में आ गए और उन्होंने समझौता कर लिया |

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यह कंपनी शिवकर जी से विमान का पूरा मोडल, डिज़ाइन, चित्र, आदि लेकर लन्दन चली गई | लन्दन जाने के बाद यह है दस्तावेज राइट ब्रदर्स के हाथ लग गए और 1903 में उन्होंने यह आविष्कार अपने नाम दर्ज करवा लिया और इसी बीच शिवकर जी की मृत्यु हो गई कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि अंग्रेजी शासन ने शिवकर जी की हत्या कर दी थी |

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Credit : Written by Manish Banaa

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जिगोलो गंदा है पर धंधा है… यहां महिलाएं लगाती हैं मर्दों की बोली! Gigolo Market Delhi

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भारत की राजधानी यूं तो कई बातों के लिए मशहूर है, मगर आज जिस बात के लिए मशहूर हो रही है उस पर किसी को फक्र तो बिल्कुल नहीं होगा | आज के समय में Sex युवा दिलों दिमाग में इस कदर छाया हुआ है कि अगर आप उनका मोबाइल या लैपटॉप देख ले तो शायद आपको कई Porn Photos और Videos देखने को मिल जाए | इसकी वजह से युवाओं का Jobs में मन नहीं लगता| देखा जाए तो युवाओ में पैसा कमाने का नशा इस कदर छाया है कि वह सही और गलत के अंतर को भी समझ नहीं पाते | इससे साफ है कि बदलते समय के साथ उन्हें पैसा और मजा दोनों चाहिए |

सुप्रीम कोर्ट ने किया धारा 497 को रद्द, अब आप दुसरे की पत्नी के साथ बना सकते है सम्बन्ध

दिल्ली के कई पोस इलाकों में मर्दों के जिस्म की मंडी लगने लगी है | इसमें Collage Student अपनी लाइफ मजे से गुजारने के लिए रात को काम करना पसंद कर रहे हैं | यहां जो जितना अच्छा काम करेगा उसकी कमाई और प्रमोशन उतना ही ज्यादा जल्दी होगी | यह काम एक मार्केट द्वारा क्या जाता  है | यह मार्केट दिन में नहीं बल्कि रात को चलती है जिसे जिगोलो मार्केट (Gigolo Market) कहा जाता है और इसमें काम करने वाले मर्द जिगोलो कहलाते हैं | यानी दिल्ली का जिगोलो मार्केट | जिगोलो यानी मेल एस्कॉर्ट (Mail escort) या फिर कॉल ब्वॉयज…

दम है तो काँच का बॉक्स तोड़ो और 20 करोड़ रुपये ले जाओ!

Gigolo Market Delhi

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रात में लगती है यह जिगोलो मार्केट Jigolo Market Looks At Night

युवा पीडी के लिए दिल्ली में एक मार्केट है जहां वह काम करके अच्छा खासा पैसा कमा रहे हैं | इस मार्केट का नाम है जिगोलो, यहां रात को मर्दों की मंडी लगती है | पैसा कमाने के लिए यह कॉलेज के स्टूडेंट अपने जिस्म का सौदा करने से भी पीछे नहीं हटते | यहां अच्छे घरों की महिलाएं लड़कों की बोली लगाती हैं. Gigolo Market Delhi

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कहां लगता है मर्दों का बाजार Where do the men’s market

मर्दों की यह मंडी दिल्ली के पॉश इलाकों (Posh areas) और साउथ एक्सस्टेशन, JNU Road, आइएनएस, अंसल प्लाजा, कनॉट प्लेस, जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर जैसे प्रमुख बाजारों की मुख्य सड़कों पर लगता है | लड़के यहां आकर खड़े हो जाते हैं और गाड़ियां रूकती हैं, जिगोला बैठता है, सौदा तय होते ही गाड़ी चल देती है |

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बड़े होटलों में मिलते हैं

शहर के पॉश इलाकों और पब – क्लबों के अलावा कई जाने माने होटलों में यह धंधा जमकर फल फूल रहा है | यहां इनकी पहचान गले में पहने पट्टे रुमाल से नहीं बल्कि ड्रेस से होती है | इनके लिए एक खास ड्रेस कोड होती है काली पैंट और सफेद शर्ट | खबर के मुताबिक, जिगोलो इन होटलों के रेस्तरां में बैठकर कॉफी की चुस्कियां लेते हुए अपने ग्राहक की तलाश करते |

Playboy Market

Playboy Market

रात 10:00 बजे से सुबह 4:00 बजे तक सजती है मंडी

एक वेबसाइट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मर्दों के जिस्म का यह कारोबार तेजी से पनप रहा है | यह कारोबार रात 10:00 बजे के बाद शुरू होता है और सुबह 4:00 बजे तक चलता है | दिल्ली के सरोजनी नगर, लाजपत नगर, पालिका मार्केट और कमला नगर मार्केट समेत कई इलाकों में रात होते ही मर्दों की जिस्मफरोशी के धंधे की मार्केट सज जाती है | दिल्ली के इस मार्केट में एडल्ट क्लास से संबंध रखने वाली महिलाएं आकर मर्दों की बोली लगाती है |

सवाल – जवाब : ऐसी कौन सी चीज है जिसे लड़की खाती भी है और पहनती है

अब डिस्को वह कॉफी हाउस में होती है डील

जिस्म के खरीदारों की है यह पोस इन इलाको की सड़कों और गलियों तक ही सीमित नहीं है | इनके लिए पब- डिस्को और Coffee House में ऑप्शन है | जिगोलो को बुक करने का काम हाई फाई क्लब -पब और कॉफी हाउस में भी होता है |  कुछ घंटों के लिए जिगोलो की बुकिंग की कीमत 1800 रुपए से 3000 रूपय और फुल नाइट के लिए ₹8000 तक में डील होती है | यहीं नहीं गठीले और six pack abs वाले मर्दों की कीमत करीब ₹15000 तक होती है |

कॉर्पोरेट सेक्टर की तरह होता है काम

यहां डीलिंग का काम पूरी तरह से सिस्टेमेटिक होता है | कमाई का 20% हिस्सा बिकने वाले मर्द को अपनी संस्था को देना होता है जिसे वह जुड़ा हुआ होता है | यही वेश्यावृत्ति वाली कहानी है, कुछ पुर्षो ने इसे अपना प्रोफेशन बना लिया है तो कुछ मजबूरी में इस दलदल में है | जानकारी के मुताबिक, इसमें Engineering and medical की तैयारी करने वाले स्टूडेंट सबसे ज्यादा है |

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ऐसे होती है पहचान

पहचान के लिए जिगोलो रुमाल और गले में पट्टे बांधते हैं उइसे उनकी पहचान होती है | जिगोलो की डिमांड उनके गले में बंधे पट्टे पर निर्भर होती है |

Gigolo Club

कैसे और कहां से होती है जिगोलो की ट्रेनिंग Gigolo Training 

कई ऐसे Organisation भी होती है जहां इन जिगोलो की ट्रेनिंग होती है | ट्रेनिंग में महिलाओं से कैसे बात की जाए, उन्हें किस तरह से संतुष्ट किया जाए, आधी बातें बताई जाती है | बता दे की कई समलैंगिक भी जिगोलो को हायर करते हैं | कई जिगोलो तो बहुत पढ़े-लिखे हैं इनमें Engineering and medical समेत Competition Exam की तैयारी करने वाले स्टूडेंट सबसे ज्यादा है | युवाओं के जिस्म के सोदेबाजी का काम बेहद प्लान तरीके से होता है, यही वजह है की कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा उन्हें अपनी संस्था को देना होता है जिनसे यह जुड़े हुए हैं |

बच्चे पैदा करने की फैक्ट्री है युगांडा!

Gigolo Market Delhi

रिपोर्ट में खुलासा

एक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1992 में  महज 27 प्रतिशत Sex worker ही कंडोम का इस्तेमाल करते थे, लेकिन साल 2011 में यह आकड़ा बडकर 86 प्रतिशत हो गया | इस रिपोर्ट के मुताबिक जितनी तेजी से मर्दों की जिस्मफरोशी बढ़ रहा है उतनी तेजी से उनमें एड्स से संबंधित जानकारियां भी बढ़ रही है | यह कारोबार दिल्ली शहर में खूब बढ़ रहा है यहां Degree college के लड़के जिस्म कारोबार में लिप्त हो रहे हैं |

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छोटे शहरों के स्टार्टअप अपने बिजनेस के लिए एंजल नेटवर्क से ले सकते हैं फंडिंग

अपने Traditional Business को Global market तक ले जाने के लिए ऐसे एंजल नेटवर्क आपकी मदद कर सकते हैं | लेकिन किसी नेटवर्क से जुड़ने से पहले उनके मॉडल और अपनी स्ट्रैंथ के बारे में ध्यान देने की आवश्यकता है | किसी भी मामले में जल्दबाजी ना करें, जरूरी नहीं है कि जो प्रोडक्ट लोकल मार्केट में अच्छा बिजनेस कर रहा हो उसकी डिमांड अन्य स्थानों पर भी उतनी ही हो |

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मास्टरक्लास का कॉन्सेप्ट (Masterclass concept)

कई एंजल नेटवर्क मास्टरक्लास का कांसेप्ट लेकर आई है | Venture Catalyst जैसे नेटवर्क छोटे शहरों के ट्रेडिशनल तरीके से बिजनेस करने वाले लोगों से मिल रहे हैं | इसमें वे Global business के फायदे बताने के साथ उन्हें नई टेक्नोलॉजी की भी जानकारी देते हैं| सोशल मीडिया के जरिए मार्केटिंग, ई-कॉमर्स आदि के फायदे ऐसी क्लास में बताते हैं, इससे बिजनेस को स्टार्ट अप में बदलने के आप प्रेरित हो सके |

मोदी सरकार की इस स्कीम से मिलेगा हर बिजनेस को लोन

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स्मॉल सिटीज में असर

ट्रेडिशनल बिजनेस को Digital व New technology के साथ एक Startup के तौर पर नई शुरुआत करने का ड्रीम अब Small cities में दिखने लगा है | लेकिन टियर -2, टीयर -3 शहरों के छोटे Business man के लिए Digital Business World में First step लेना इतना आसान नहीं है| नई टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग के नए फंडे Small city businessman के लिए सबसे बड़ी चुनौती है | मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद सहित अन्य मेट्रो सिटीज में तो एक स्टार्टअप आइडिया को सपोर्ट करने के लिए बड़े इन्वेस्टर मौजूद हैं लेकिन इंडिया के टियर-2 और टियर- 3 में नए आईडिया को बूस्ट करने के लिए अभी इन्वेस्टरों की कमी है| Small Cities Entrepreneur की मदद के लिए कई इन्वेस्टर फर्म अब आगे आने लगी हैं जिनकी मदद से वह लोकल मार्केट में अपनी पहचान बना सकता है, हर बिजनेसमैन की तरह यहां भी एंटरप्रेन्योर को थोड़ा धैर्य रखने की खास जरूरत होगी |

ऑनलाइन ब्लॉगिंग के जरिए कमा सकते हैं अच्छे खासे पैसे!

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यह है वे एंजल नेटवर्क

स्मॉल सिटी एंटरप्रेन्योर की Investment and mentorship जैसी परेशानियों को दूर करने के लिए वर्तमान में भारत में 30 से अधिक एंजल नेटवर्क काम कर रहे हैं | इनमें प्रमुख है चंडीगढ़ एंजल नेटवर्क, दी चेन्नई, कोलकाता एंजेल्स ,वेंचर कैटीलिस्ट व अन्य इन नेटवर्क में सम्मिलित हुए हैं | जो की स्माल सिटी बिजनेसमैन की समस्याओं को अच्छे से समझते हैं यह सभी Angel Network बीते करीब एक दशक के दौरान बने हैं | यह नेटवर्क विभिन्न प्रयास के जरिए स्मॉल सिटीज तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं |

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100 से अधिक स्टार्टअप में निवेश

ऐसे एंजल नेटवर्क ने बीते कुछ समय में 100 से अधिक स्टार्टअप में निवेश किया है, जिनमें सबसे अधिक संख्या टियर-2 और टियर-3 में प्रारंभ हुए स्टार्टअप की है | वर्ष 2018 में ऐसे नेटवर्क ने छोटे शहरों के Startup में 70 करोड़ डॉलर से अधिक का इन्वेस्टमेंट किया है | स्माल सिटीज स्टार्टअप में इन्वेस्ट करने के मामले में टॉप पर वेंचर कैटलिस्ट है जिसने वर्ष 2018 में स्टार्टअप में इन्वेस्ट किया | ऐसे एंजल जयपुर, अहमदाबाद, चेन्नई जैसे शहरों में आगे बढ़े हैं. कारदेखो और फ्रेशवर्क जैसी कंपनियों को भी शुरुआती दौर में इनका सहारा मिला था |

यह है हीरो या हीरोइन बनने का तरीका ! फिल्म और टीवी इंडस्ट्री

दोस्तों आर्टिकल लिखने के लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ती है और मेरा काफी समय लग जाता है इसलिए में आपसे एक लाइक, शेयर और कमेंट की उम्मीद करता हूँ… और अगर आप मुझे सपोर्ट करना चाहते है तो आप पीले रंग के Follow बटन पर भी क्लिक कर सकते है | धन्यवाद

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