दुबई पुलिस की ये खास बातें आपको कोई नहीं बताएगा

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, दुबई एक ऐसा शहर है जो आजकल दुनिया भर में काफी पॉपुलर है, हर कोई यहां एक न एक बार घूमने के लिए आना जरूर चाहता है | पर ऐसा क्या है जो, दुबई आजकल इतना ज्यादा फेमस है और लगातार इसकी पापुलैरिटी बढ़ती जा रही है | तो दुबई में ऐसी बहुत सी चीजें है जो इसे दुनिया से अलग बनाती है | जैसे सबसे ऊंची बिल्डिंग, बेहद खूबसूरत पार्क्स, सबसे बड़े मॉल और भी बहुत कुछ | यहां की पुलिस भी दुनिया से काफी अलग और काफी एडवांस है तो हमें भी यहां की पुलिस के बारे में काफी कुछ जान लेना चाहिए, इसलिए आज हम आपको दुबई की पुलिस और Dubai police cars के बारे में कुछ हैरान करने वाली बातें बताने वाले हैं |

Dubai police cars

Dubai police cars

दुबई में हर इंसान के पास औसतन 2 Car है और इनमें Ferrari and Lamborghini जैसी Super Cars भी काफी ज्यादा है | तो अगर कोई इन कार्स से क्राइम करता है तो उसे पकड़ना वहां की पुलिस के लिए काफी मुश्किल हो सकता था | इसीलिए वहां की पुलिस को भी काफी एडवांस बनना पड़ा दुबई की पुलिस के पास काफी खूबसूरत सुपर कार्स तो है ही साथ ही यह कार्स काफी पावरफुल भी है | जैसे इनकी लेटेस्ट कार लैंबोर्गिनी अवेंटेडोर में 12 सिलेंडर 6.5 लीटर इंजन लगा हुआ है जो इसे काफी पावरफुल बनाता है |

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बहुत से लोगों को अपनी कार्स की नंबर प्लेट पर कुछ स्पेशल नंबर डलवाने का शौक होता है | दुबई पुलिस की कार्स पर भी कुछ स्पेशल नंबर देखने को मिल सकते हैं जैसे अभी यहां की पुलिस कार बीएमडब्ल्यू I8 का नंबर है 2020 | ऐसे यहां की Government ने सन 2020 में होने वाले World Dubai Expo की वजह से किया था |

Dubai police cars

Dubai police cars

2017 में दुबई पुलिस ने अपने बेड़े में शामिल कि दुनिया की सबसे तेज पुलिस कार को जिसका नाम है Bugatti Veyron इसकी हाईएस्ट स्पीड है लगभग 407 किलोमीटर प्रति घंटा | इसके इंजन की ताकत 1000 हॉर्स पावर है, ये 0 से 96 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड महज 2.5 सेकंड में पकड़ लेती है | इससे पहले दुनिया की सबसे तेज पुलिस कार होने का रिकॉर्ड इटली की लेंबोर्गिनी कार्स के पास था जिनकी स्पीड है 370 किलोमीटर प्रति घंटा थी | दुबई पुलिस की बुगाटी वेरॉन की कीमत है 1.7 मिलियन डॉलर यानी लगभग 11 करोड़ 82 लाख रुपए |

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दुबई की पुलिस काफी फ्रेंडली भी है लेकिन अच्छे लोगों के लिए | आप अगर दुबई में इन सुपरकार्स को देखना चाहते हैं तो आप दुबई मॉल या फिर जूमेरा रोड पर जाइए, क्योंकि वहां पर आपको यह पुलिस कार्स पेट्रोलिंग करती हुई दिख सकती है | दुबई की पुलिस का कहना है कि अक्सर टूरिस्ट मजाक मजाक में उनसे खुद को अरेस्ट करने के लिए भी कहते हैं, ताकि वह इन सुपर कार्स पर बैठ सकें |

Dubai police cars

Dubai police cars

दुबई की पुलिस के पास आपको फेरारी भी देखने को मिलेगी, दुबई पुलिस के पास जो फेरारी है उसका नाम है Ferrari FF | एक और अमेजिंग बात यह है कि दुबई पुलिस के अधिकारियों ने अनाउंस किया है कि फेरारी एफएफ को केवल दुबई पुलिस की महिलाएं ही ड्राइव करेंगी |

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इतनी शानदार कार्स जो दुबई पुलिस के पास है इन्हें खुद अपनी कमाई से खरीद कर चलाना हर किसी के बस की बात नही होती, क्योंकि यह कार्स काफी ज्यादा महंगी है | तो इन्हें चलाने का सबसे आसान तरीका है कि दुबई पुलिस को ज्वाइन कर लिया जाए, तब तो यह कार्स चलाने को मिलेंगी | यह इतना आसान नहीं है दुबई पुलिस की इन कार्स को चलाने के लिए ड्राइवर को काफी कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरना पड़ता है | यहां की पुलिस को कई लैंग्वेज आनी चाहिए, इनकी कम्युनिकेशन स्किल और ड्राइविंग स्किल अच्छी होनी चाहिए | इनका Sense of Humor भी अच्छा होना चाहिए इन सब शर्तों को पूरा करने के बाद ही यह कार्स चलाने को मिलती है |

Dubai police cars

Dubai police cars

दुबई पुलिस फोर्स में केवल ऐसी सुपर कार्स ही नहीं है बल्कि उनके पास एनवायरमेंट को सेव करने वाली Hybrid Electric Cars भी है | यानी यहां की पुलिस शानदार सुपर कार्स के साथ खुद को फ्यूचरिस्टिक तो बनाती है,साथ ही एनवायरनमेंट को सेफ रखने पर भी काम करती है |

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दुबई पुलिस स्टेशन अब स्मार्ट हो रहे हैं | दुबई में दुनिया का पहला स्मार्ट पुलिस स्टेशन है जिसमें किसी इंसान की जरूरत नहीं है | यहां पर आप किसी भी तरह के क्राइम्स की रिपोर्ट Futuristic machine से दर्ज कर सकते हैं | यहां पर आपको कोई पुलिस वाला नहीं दिखाई पड़ेगा, केवल आपको यहां मशीन ही दिखाई देगी और उनसे आप काफी आसानी से रिपोर्ट कर सकेंगे फिर दुबई पुलिस इसपर तुरंत एक्शन लेंगी |

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फ्लाइंग बाइक, दुबई की पुलिस दुनिया की पहली पुलिस है जिसके पास उड़ने वाली बाइक भी है और जल्दी ही मतलब केवल 1 साल में ही बहुत सी Flying bikes दुबई पुलिस के बेड़े में शामिल हो जाएंगी | इन बाइक्स की स्पीड 96 किलोमीटर प्रति घंटा है | यह एक बार चार्ज होने पर 40 मिनट तक उड़ सकती है फिलहाल ऐसी केवल एक बाइक दुबई पुलिस के पास है वो भी Training Purpose के लिए, 2020 में ऐसी बहुत सी बाइक इनके पास होंगी |

Dubai police fling bike

Dubai police fling bike

दुबई की पुलिस काफी फ्यूचरिस्टिक है यह तो आपने अब तक जान ही लिया होगा | इसको और भी फ्यूचरिस्टिक बनाते हैं ‘रोबोट पुलिस ऑफिसर‘| दुबई का पहला Robot police officer यहां के मॉल्स और टूरिस्ट प्लेसेस में पेट्रोलिंग करता हुआ आपको दिख सकता है | इनको आप रिपोर्ट कर सकते हैं, फाइंस भर सकते हैं और इन रोबोट पुलिस के चेस्ट पर लगी टचस्क्रीन के द्वारा आप इंफॉर्मेशन हासिल कर सकते हैं | यहां कि गवर्नमेंट 2030 तक अपनी पुलिस फोर्स में 25% रोबोट्स शामिल करना चाहती है | हालाकी ये रोबोट्स इंसानों को रिप्लेस करके नहीं रखें जाएंगे बल्कि अलग से रखे जाएंगे |

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जेल में कैदियों को कैसा खाना मिलता है, जानकर हैरान रह जायेगे

हेल्लो दोस्तों मेरा अनिल पायल है, फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि, एक थाली में दो सूखी रोटी थोड़ी सी सब्जी और एक एलमुनियम मग में पानी ही उन कैदियों का नसीब होता है जो जेलों में बंद है | आज हम बात करने वाले हैं कि जेलों में कैदियों को कैसा खाना दिया जाता है |

Prisoners food menu

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इन राज्यों की सरकारें सबसे ज्यादा खर्च करती हैं अपने कैदियों पर

असल में जेलों में कैदियों को कैसा खाना मिलता है यह स्टेट पर डिपेंड करता है कि वहां की सरकारे अपने कैदियों पर कितना खर्च करना चाहती है, क्योंकि भारत में जेलों का मैनेजमेंट राज्य सरकारों के पास है| NCRB यानी नेशनल क्राइम्स रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक राज्य सरकारे औसतन प्रति कैदी ₹52.42 पैसे खर्च करती है | जिसमें उन्हें सुबह के नाश्ते के साथ दो टाइम का खाना भी मुहैया कराया जाता है | जम्मू-कश्मीर और नागालैंड की सरकारें अपने कैदियों पर सबसे ज्यादा खर्च करती है तो वहीं दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश की सरकारे अपने कैदियों पर सबसे कम खर्च करती है |

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यह मिलता है ब्रेकफास्टलंच और डिनर में कैदियों को

होम मिनिस्ट्री द्वारा मॉडल प्रीजम मैनुअल में यह गाइडलाइन दी गई है कि पुरुष कैदी को 2320 कैलरी और महिलाओं को 1900 कैलरी रोजाना मिलनी चाहिए| लेकिन जो प्लेट पर मिलता है वह बहुत ही बुरा होता है पतली दाल, चार रोटियां और कुछ साधारण चावल भी मिलते हैं | खाना लिमिटेड ही मिलता है इसलिए कुछ कैदी खाना बांट कर खाते हैं तो कुछ कैदी बाहर से खाना मंगाते हैं| लेकिन बाहर से खाना मंगाने के लिए स्पेशल परमिशन लेनी होती है एक बार परमिशन मिलने पर आप कुछ लिमिटेड खाना ही बाहर से मंगा सकते हैं और यह परमिशन भी हर बार नहीं मिलती है | एक बंदा जो अभी नया-नया ताजा तिहाड़ जेल से छूटा है उससे पता चलता है की ब्रेकफास्ट सुबह 7:00 बजे मिलता है जिसमें चाय और पोहा या फिर कुलचे और छोले मिलते हैं | लंच 12:30 पर मिलता है जिसमें 4 रोटी होती है 1 सीजनल सब्जी होती है या फिर चावल और दाल होते हैं | शाम में चाय और बिस्किट भी मिल जाते हैं जबकि डिनर में सेम लंच वाला खाना ही उसमें कुछ सब्जियां अलग हो सकती है और अगर लंच में खाना बच जाता है तो वही खाना डिनर में भी मिलता है| संडे एक मजेदार दिन होता है उसमें पनीर की डिशेज कढी और राजमा भी मिलता है |

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जेलों में कैदी यह कर सकते हैं पूरी आजादी से

तिहाड़ जेल में एक बेकरी भी है जहां मार्केट से ज्यादा अच्छे बेकरी आइटम्स मिलते हैं जेल का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं| कई लोग तो सिर्फ इसलिए डर जाते हैं कि जेलों में बहुत ही बुरा खाना मिलता है जेलों में कैंटीन भी होती है जहां से कैदी खाना खरीद सकते हैं| कैदी हर महीने अपने घर से ₹2000 तक मंगा सकते हैं इसके अलावा कैदी जो जेलों में काम करते हैं वहां से भी उन्हें पैसे मिलते हैं तो उन पैसों से भी कैंटीन से खाना खरीद सकते हैं| तो नतीजा यह निकलता है कि हर जेल में अलग तरह का खाना मिलता है किसी जेल में काफी सही खाना मिलता है तो किसी जेल में बहुत ही बुरा खाना मिलता है| जैसे कि गुड़गांव की डिस्ट्रिक्ट जेल से छूटे एक कैदी से पता चलता है कि वहां पर जो दाल मिलती है उसमें 90% पानी होता है जबकि नागालैंड, जम्मू कश्मीर की जेलों में काफी बैटर खाना मिलता है |

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रोलेक्स की घड़ियां इतनी लग्जरी और महंगी क्यों होती है, हेरान कर देने वाली जानकारी

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, रोलेक्स एक ऐसा ब्रांड है जो कि अपनी शानदार लग्जरी और महंगी घड़ियों के लिए जानी जाती है |  इसी वजह से शुरू से ही यह लोगों के स्टेटस का सिंबल बन चुकी है और जैसे जैसे लोगों के पास पैसे आ रहे हैं इसकी लोकप्रियता भी काफी तेजी से बढ़ती जा रही है|  हलांकि इसके महंगे होने की कुछ उचित वजह भी है जैसे कि रोलेक्स की घड़ियां हर परिस्थितियों में चाहे समुद्र के 100 फीट अंदर या फिर एवरेस्ट जैसे ऊंचे पहाड़ों पर भी अपनी सटीक समय दर्शाने के लिए जानी जाती है | दोस्तों घड़ियों में यह एकमात्र ऐसा ब्रांड है जिसे लोग अपने हाथों से असेंबल करते हैं, मतलब की रोलेक्स की हर एक घड़ी हैंडमेड होती है | यही वजह है कि इतनी बड़ी कंपनी हर रोज सिर्फ 2 हजार घड़ियां ही बना पाती है |

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रोलेक्स कंपनी बनने का इतिहास

सबसे पहले हम इस कंपनी के इतिहास को जान लेते हैं जो कि आपको जरूर मोटिवेट करेगी | इस कहानी की शुरुआत होती है 1881 से, जब जर्मनी के एक छोटे से कस्बे में हंस विल्स्दोर्फ़ का जन्म हुआ | 12 साल की उम्र में अपने माता पिता को खोने के बाद वह अनाथ हो गए और कैसे भी करके सरकारी स्कूल से उन्होंने अपने शुरुआती पढ़ाई की | फिर जब वह 19 साल के थे तब पहली बार उन्होंने घड़ियों की दुनिया में कदम रखा| दरअसल पैसों की किल्लत की वजह से हंस विल्स्दोर्फ़ के दोस्त ने उन्हें अपने पिता की एक घड़ी एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी में नौकरी दिलवा दी | फिर आगे चलकर 1903 में लंदन की एक घड़ी बनाने वाली कंपनी में काम करते हूए विल्स्दोर्फ़ घड़ी बनाने की बारीकियों को भी सीख चुके थे |

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इस तरह से शुरू हुई रोलेक्स कंपनी

अब बारी थी अपने लिए कुछ बड़ा करने की और इसीलिए उन्होंने अपने साले अल्फ्रेड डेविस की आर्थिक मदद से 1905 में  विल्स्दोर्फ़ एंड डेविस कंपनी की शुरुआत की | कंपनी शुरू करने के बाद पहले तो उन्होंने बाहर के देशों से घड़ियों को इंपोर्ट करना शुरू किया लेकिन जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ा तो आगे चलकर खुद की घड़ियां बनाने लगे | इसी कंपनी को 1908 में रोलेक्स के नाम के साथ रजिस्टर्ड किया गया साथ ही इसी साल विल्स्दोर्फ़ और डेविस ने स्वीटजरलैंड में भी अपनी कंपनी की ऑफिस खोल ली | हालांकि 1919 में इंग्लैंड सरकार द्वारा बहुत ही ज्यादा टैक्स बढ़ाने की वजह से विल्सडोर्फ को अपना लंदन वाला ऑफिस बंद करना पड़ा लेकिन उन्होंने जिनेवा स्विट्जरलैंड में अपना काम जारी रखा और यहीं पर आज भी रोलेक्स का हैडक्वाटर है| रॉलेक्स ने धीरे-धीरे मार्केट पर अपनी पकड़ बनानी शुरू की और 1926 में विल्सडोर्फ ने रोलेक्स की अपनी पहली वाटरप्रूफ घड़ी बनाई | दरअसल विल्स्दोर्फ़ हमेशा से एक ऐसी घड़ी बनाना चाहते थे जो कि बाहरी फैक्टर से कभी भी अफेक्टेड ना हो | 

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रोलेक्स की घड़ी से जुड़ी कुछ खास बातें

आगे भी समय के साथ साथ रोलेक्स की घड़ियों को अपडेट किया गया जैसे कि 1945 में रोलेक्स ने अपनी घड़ियों में पहली बार तारीख दिखाने का फीचर जोड़ दिया और फिर अपनी घड़ियों के बेस्ट क्वालिटी के लिए वह हर घड़ी के साथ कई सारे टेस्ट करवाएं | जैसे कि हाई प्रेशर वॉटर टेस्ट, हाई एल्टीट्यूड टेस्ट और इसी तरह के बहुत सारे टेस्ट और जब इन मानको पर रॉलेक्स की घड़ियां खरी उतरती तो फिर इसे आगे भेजा जाता है | 1953 में माउंट एवरेस्ट को पहली बार फतह करने वाले एडमंड हिलेरी ने रोलेक्स की घड़ी पहन कर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कि और इतनी हाय एल्टीट्यूड होने के बावजूद भी इस घड़ी के समय में 1 सेकंड का भी अंतर नहीं आया |

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इसी तरह से रोलेक्स की घड़ी को 1960 में भी समुद्र के 100 फीट अंदर पनडुब्बी कि मदद से भेजा गया और वहां पर पानी का इतना प्रेशर होने के बाद भी घड़ी पूरी तरह से सही काम कर रही थी | इन सभी बातों से आप अंदाजा लगा ही सकते हैं कि पहाड़ की ऊंचाई हो या समुद्र की गहराई हर जगह पर रोलेक्स की घड़ियां सटीक काम करती है और यही फीचर्स रोलेक्स की सबसे बड़ी खासियत और ताकत है| रोलेक्स ने पहली बार 2008 में भारत में कदम रखा और यहां के भी पैसे वाले लोगों के लिए यह पहली पसंद है इन घड़ियों का रेंज ₹2 लाख से शुरू होकर करोड़ों तक जाती है, लेकिन जो घड़ियों के शौकीन हैं और जिनके पास पैसे भी पर्याप्त है वह इस ब्रांड की घड़ी को तो खरीदना जरूर ही पसंद करेंगे | 2017 की एक रिपोर्ट के हिसाब से रोलेक्स की ब्रांड वैल्यू लगभग 8 बिलियन डॉलर हैं |

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दोस्तों आप रोसेक्स की धड़ी कब खरीदने वाले है ? 

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दम है तो काँच का बॉक्स तोड़ो और 20 करोड़ रुपये ले जाओ!

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, कंपनिया अपने Product को बेचने के लिए हर तरह के Advertising कर रही है, जैसे बड़े बड़े सेलिब्रिटी से ऐड कराना, अजीब अनोखे टास्क वाले एडवर्टाइजमेंट और भी बहुत कुछ | दोस्तों में आपको कुछ ऐसे एडवरटाइजमेंट के तरीके बताऊंगा जिनके बारे में शायद आप सोच भी नहीं सकते की, कंपनियां अपने प्रोडक्ट को ऐसे भी Advertisement कर सकती हैं |

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दोस्तों बाहर के कई देशों में Billboard पर पुरानी तरह से Advertising करना एक पुरानी बात हो गई है,क्योंकि 2011 स्वीडन में McDonald ने जिस तरह से अपना एडवर्टाइजमेंट किया वह वाकई में काबिले तारीफ था| स्वीडन में मैकडोनाल्ड ने अपने एक Restaurant की building पर एक बहुत बड़ी सी स्क्रीन लगा दी| अब आप सोच रहे होंगे की उसमें क्या खास है क्योंकि ऐसा तो हर जगह हो रहा है तो जरा सुन लो उस स्क्रीन पर एक वेबसाइट थी picknplay.se, जिसमें आप रजिस्टर करके पिंगपोंग गेम को एक बड़ी सी स्क्रीन पर खेल सकते हैं| लेकिन गेम स्टार्ट करने से पहले आपको कुछ ना कुछ इस वेबसाइट से ऑर्डर करना होगा, मान लो अपने एक बर्गर ऑर्डर किया और आपके अपोनेंट ने भी कूछ आर्डर किया| अगर दोनों ने इस गेम में बॉल को 30 सेकंड तक होल्ड कर लिया तो जो कुछ आपने आर्डर किया है वह बिल्कुल फ्री में आपको मिलेगा|

सड़क किनारे दांत निकालना और कान साफ करना है गैरकानूनी, भारत के 14 अजीबोगरीब कानून!

दोस्तों संत्रे और नींबू में कुछ मात्रा में करंट होता है यह तो आपको मालूम ही होगा और अगर नहीं मालूम तो एल्यूमीनियम और कॉपर के टुकड़े ले लो और उन्हें संतरे में सही दूरी पर डाल दो और मल्टीमीटर से चेक करने पर आपको 2 एम्पीयर तक का करंट देखने को मिल सकता है| लेकिन यह मैंने आपको क्यों बताया आप यही सोच रहे होंगे | दोस्तों इतना कुछ बताने का मकसद यह था कि, फ्रांस की एक Advertising Agency ने इन संतरो की मदद से एडवरटाइजमेंट ही कर डाला| यह एडवरटाइजमेंट ट्रॉपिकाना कंपनी का था जिसमें एडवर्टाइजर संतरे से निकले करंट का यूज़ एडवरटाइजमेंट में करना चाहते थे| इन वर्कर्स ने 2500 संतरो का यूज करके बिलबोर्ड बनाया और इस नेचुरल इलेक्ट्रिसिटी से उन्होंने नेचुरल एनर्जी लिखा और उसे ग्लो भी किया|

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दोस्तों यह सब एडवर्टाइजमेंट बहुत अलग थे लेकिन अब जो एडवर्टाइजमेंट मैं आपको बताने जा रहा हूं वह इन सब का बाप है, क्योंकि इस एडवर्टाइजमेंट में कंपनी के 20 करोड़ दांव पर लगे थे| वैंकूवर की एक कंपनी है जो ऐसे ग्लास बनाती है जिसको तोड़ना नामुमकिन है और अपने इन ग्लास का एडवरटाइजमेंट करने के लिए इस कंपनी ने Vancouver City के बस स्टॉप के पास ग्लास में 20 करोड़ रुपए रख दिया और लिख दिया जिसने ग्लास को तोड़ लिया यह सारे पैसे उसके | तो फिर होना क्या था पहले दिन से लोग हथौड़े, गन, पथर, और सारे खतरनाक समान लेकर उस ग्लास को तोड़ने के लिए आने लगे लेकिन कोई भी उस ग्लास को तोड़ने में सफल नहीं हुआ| इस एडवरटाइजमेंट से कंपनी का बहुत फायदा हुआ और इस कंपनी को बहुत से नए प्रोजेक्ट भी मिले जिससे इस कंपनी ने बहुत पैसे भी कमाए |

सवाल – जवाब : ऐसी कौन सी चीज है जिसे लड़की खाती भी है और पहनती है

दोस्तों 2016 में स्वीडन की एक एडवरटाइजमेंट कंपनी जिसका नाम एनिमल क्रिएटिव एजेंसी है और इस कंपनी ने रिबॉक के लिए एडवरटाइजमेंट कैंपेन शुरू किया|  इस कंपनी ने एडवर्टाइजमेंट करने के लिए एक शोकेस स्वीडन के स्ट्रीट पर रखा जिसमें रिबॉक के जूते मौजूद थे और यह शोकेस कोई आम शोकेस नहीं था, क्योंकि शोकेस में ऐसे सेंसर लगे थे जो आपके दौड़ने की स्पीड को मेजर करते हैं और जो भी सक्स इस शोकेस के पास से 17 किलोमीटर की स्पीड से दौड़ता हुआ निकल गया वह रिबॉक के ब्रैंड नए जूते फ्री में पा गया|

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नवंबर 2015 में RISE OF THE TOMB RAIDER को लॉन्च किया गया और अगर आप गेम लवर होंगे तो आप इस गेम को जरूर जानते होंगे| लेकिन हम यहां गेम की बात नहीं कर रहे बल्कि लंदन में इसे एडवर्टाइजमेंट बिल्कुल ही अलग लेवल पर किया गया | इस गेम का एडवर्टाइज करने के लिए असली 8 लोगों को बिलबोर्ड पर खड़ा किया गया और अलग-अलग तरह की मुश्किलें उनके ऊपर डाली गई क्योंकि इस एडवर्टाइजमेंट में जो सबसे लास्ट में बिलबोर्ड से उतरता है वह जीत जाता और यह कंपटीशन पूरे 22 घंटे तक चला |

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दोस्तों अब जरा इस एडवर्टाइजमेंट को देखिए जिसमें एक ऐसा यूनीक बिलबोर्ड 20 नाम की कॉस्मेटिक कंपनी के लिए बनाया गया| जिसमें एक खुशनुमा चेहरा स्टीकर्स से बने रूखे चेहरे के अंदर छूपा दिया गया,  जैसे जैसे लोग उन स्टीकर्स को निकालते गए वैसे वैसे एक बिल्कुल अलग चेहरा लोगों को दिखता गया मतलब आप समझ गए होंगे कि यह क्रीम कंपनी क्या दिखाना चाहती थी | लेकिन पता नहीं असल जिंदगी में यह क्रीम इतनी कारगर है या नहीं |

अभी तक आपने कई एडवर्टाइजमेंट देखें जिसमें सारे एडवर्टाइजमेंट इंसानों के लिए थे लेकिन अब यह एडवरटाइजमेंट Dog food के लिए है | जर्मन की एक पैट फूड कंपनी जिसका नाम ग्रेनाटा पेट है उन्होंने एक एडवर्टाइजमेंट बनाया यह Advertising अपने आप में एक Unique Advertising था क्योंकि इस एडवर्टाइजमेंट में कंपनी ने एक मशीन लगाई और उसके ऊपर लिखा की फोर स्क्वेयर नाम की वेबसाइट पर रजिस्टर करें और फ्री में पेट फूड पाएं | जैसे ही कोई फोर स्क्वेयर में रजिस्टर करता नीचे बने एक बॉक्स में डॉग फूड आ जाता है|

पटाखों का आविष्कार कब, कहां और कैसे हुआ!

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डेलबी 1 नाम की एक Advertising company ने 2013 में British Airlines के लिए ऐसा एडवर्टाइजमेंट बनाया जो किसी मैजिक से कम नहीं था| इस एडवर्टाइजमेंट में खास यह था जब भी इस बड़ी सी स्क्रीन के ऊपर से कोई ब्रिटिश एयरलाइन का प्लेन जाता तो एक बच्चा अपने आप ऊपर आसमान की तरफ मुंह करके चलने लगता और अपने हाथों से उस प्लेन को लोगों को दिखाने लगता है| इतना ही नहीं उस बिलबोर्ड के ऊपर से जो प्लेन जा रहे थे उसका फ्लाइट नंबर और कहां से उस प्लेन ने उड़ान भरी है यह सब उस बिलबोर्ड पर दिखाती है|

ऑर्फीया नाम की एक कंपनी कीड़ों को मारने के लिए प्रोडक्ट बनाती है उन्होंने एडवर्टाइजमेंट के लिए बिल्कुल अलग तरह का बिलबोर्ड बनवाया, जिसमें उन्होंने एक बड़े से बिलबोर्ड को एक इंसेक्ट ट्रैप में बदल दिया | इटली में यूज किया गया यह जीनीयस तरीका बहुत ही Success हुआ क्योंकि इस एडवर्टाइजमेंट में ना कोई टेक्नोलॉजी का यूज किया गया ना ही कोई computer graphics का | बल्कि इस बिलबोर्ड को बनाने में असली इंसेक्ट का यूज किया गया वह ऐसे की इस बिलबोर्ड में ग्लू लगाया गया जिसमें इंसर्ट यहां आए तो लेकिन जा ना पाए और जब यह इंसेक्ट पूरी तरह से ग्लू से चिपक गए तो यह बिल्कुल फोटो जैसा दिखने लगा|

चोरी का सामान खरीदने पर आपके साथ क्या – क्या हो सकता है

दोस्तो Nike shoes कंपनी ने शंघाई में एडवरटाइजिंग करने के लिए एक बिल्डिंग पर सिर्फ एक पैर का बिल बोर्ड लगाया, और फिर उसमें वर्कर्स की मदद से जो मैटेरियल नए जूते बनाने में यूज हुए, उसी से उस बिलबोर्ड पर बने पैर को उन मैटेरियल से ढका |

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दोस्तों अब जरा इस एडवर्टाइजमेंट पर नजर डालिए जिसमें कोका कोला ने अपनी स्प्राइट सॉफ्ट ड्रिंक का एडवर्टाइजमेंट ब्राजील के बीच पर कुछ इस प्रकार किया | यह मत सोचिए कि इसमें से स्प्राइट निकल रही है क्योंकि यह पानी है और इसमें शावर लेने के बाद ही आपको एक स्प्राइट की बोतल दी जाती है| दोस्तों इस एडवर्टाइजमेंट से कंपनी को बहुत ज्यादा फायदा हुआ |

(Stethoscope) एक डॉक्टर की शर्म की वजह से हुवा यह महान आविष्कार!

दोस्तों आपको इनमे से कोनसा एडवर्टाइजमेंट सबसे ज्यदा अच्छा लगा हमे  कमेंट में जरुर बताये |

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दुनिया की 7 सबसे खतरनाक और अजीब बंदूकें !

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, गंस जिसका निर्माण तो सुरक्षा के लिए किया गया था पर यह आज तबाही का एक कारण बन चुकी है| सुरक्षा एजेंसी के साथ साथ इसका इस्तेमाल गुनाह करने के लिए भी होता आ रहा है, पर इस दुनिया में कुछ गंस ऐसे भी मौजूद हैं जिन्होंने बंदूकों की आम धारणाओं को छेद देते हुए अपने अलग रूप और इस्तेमाल से दुनिया को चौंका दिया है| आज दोस्तों हम जानने वाले हैं दुनिया के 7 सबसे अजीब और खतरनाक बंदूकों के बारे में|

The world's 7 most dangerous and weird guns

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रेमिंगटन 1859 रिवाल्वर

पोलैंड में रहने वाले रिजाईस टोबैसिस व्यक्ति ने रेमिंगटन 1859 रिवाल्वर बनाया इसे रिवाल्वर दुनिया की सबसे बड़ी रिवाल्वर होने का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का खिताब दिया गया है|,यह रिवाल्वर उठाकर चलाने के लिए शायद हलक की जरूरत पड़ेगी क्योंकि इसका वजन है 45 किलोग्राम है | 1.25 मीटर लंबी और 40 सेंटीमीटर ऊंची यह रिवाल्वर आप हाथों से उठाकर तो बिल्कुल भी नहीं चला सकते| इसे इसके खास बनाए गए स्टैंड पर रख कर ही चलाना पड़ता है इस रिवाल्वर में 6 गोलियां समा सकती है जिसमें से हर एक गोली का वजन 136 ग्राम होता है|

वीडियो एडिटिंग में है जबरदस्त कैरियर बनाने के कई अवसर !

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रिंग शेप गन

आजकल की हिंसक बनी दुनिया में हर किसी को अपनी सुरक्षा की जरूरत महसूस हो रही है| लूट, बलात्कार, जबरन चोरी आदि | हमें इन से बचने के लिए खुद को पहले से ही तैयार रहना पड़ेगा. रिंग शेप गन एक ऐसी ही छोटी गन है जो आप हर वक्त अपने पास रख सकते हो| पुराने जमाने में इंग्लैंड में बनी यह रिंग किसी भी बड़े गन इतनी घातक होती है हालांकि इसकी गोलियां छोटी होती है पर इंसानी शरीर पर यह बड़ा आघात कर सकती है| खास महिलाओं के लिए बनी यह रिंग शेप गन उन्हें कठिन हालातों में खुद की सुरक्षा करने का मौका देती है|

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The world’s 7 most dangerous and weird guns

गैटलिंग गन (Gatling gun ) 

गैैटलिंग गन को बनाने के लिए इसके निर्माताओं ने छह रशियन SKS Rifles का इस्तेमाल किया है| बड़ी मात्रा में मौजूद शत्रु का खात्मा करने के लिए इस गन का इस्तेमाल किया जा सकता है.  6 राइफल्स को एक साथ जोड़ देने के वजह से एक ही बार में 6 गुना ज्यादा गोलियों की बौछार यह शत्रुओं पर कर सकता है| जिसकी वजह से आपके इलाके में बढ़ रहे शत्रु को कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए इससे बेहतर गन शायद ही आपको कहीं मिलेगा|

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Volley gun 

Volley gun – इस गन को यह नाम डक जाने की बतख के पैरों जैसी दिखने वाली इसकी नलियों की वजह से मिला है|  यह नलियां 4 या 3 भी हो सकती है जो एक दूसरे से एक निश्चित एंगल से मुड़ी होती है इसके पीछे का मकसद है चार लोगों के खिलाफ एक व्यक्ति ऐसी लड़ाई| अगर आप के सामने चार दुश्मन एक निश्चित एंगल पर खड़े हो तो इसके एक ही फायर में आप चारों लोगों को ढेर कर सकते हो|

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Magpul FMG-9

आप जेम्स बॉंड की Movies तो देखते ही होंगे James Bond की मूवीस में दिखाया गया है कि कैसे Gadgets अचानक से अपना रूप बदल लेते हैं| कुछ इसी तरह अपना रूप बदलने में माहिर है मैगपूल FMG 9 मशीन गन इसके नाम में ही इसका राज छिपा है FMG याने की Folding Machine Gun | जब यह फोल्ड की जाती है तो ऐसा लगता है कि मानो यह कोई रेडियो हो पर इसका बस एक बटन दबाने से रेडियो से मशीन गन बन जाती है| सरकारी एजेंसी को जब कोई Top secret mission को अंजाम देना होता है तब इस गन का इस्तेमाल मिशन के दौरान किया जाता है|

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The world's 7 most dangerous and weird guns

The world’s 7 most dangerous and weird guns

Glock With 100 Round Drum

यह गन किसी बच्चे का खिलौना नहीं है दोस्त… यह है शौ कारतूसों से भरी ग्लॉक गन| यह गन दिखने में जितनी ताकतवर दिखती है यह उससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक है 5 सेकंड में यह 100 राउंड फायर कर सकती है| 1 गन में दो मैगजीन लगे होते हैं और हर एक मैगजीन में 50 से ज्यादा गोलियां मौजूद होती है जैसे ही आप ट्रिगर दबाते हो,यह मैगजीन कुछ इस तरह से घूमना शुरू होता है जैसे किसी गाड़ी का पहिया घूम रहा हो ऑब्जेक्ट्स जिस पर आप गोलियां चला रहे हो उसे सोचने तक का वक्त यह गन नहीं देती और ऑब्जेक्ट की बॉडी गोलियों से छलनी हो जाती है|

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Punt Gun 

19वीं और 20वीं शताब्दी में यूज की जाने वाली यह इस लिस्ट की सबसे बड़ी गन है जिसका नाम है Punt Gun | इसकी साइज और वजन की वजह से यह गन कोई भी एक इंसान नहीं उठा सकता इसे उठाने के लिए कम से कम 2 इंसान तो लगते ही है| यह बंदूक आमतौर पर छोटी सी नाव पर लगाई जाती थी इसके निर्माण के पीछे का कारण बेहद दिलचस्प है| उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी में अमेरिका में बतखों का व्यवसायिक तौर पर शिकार किया जाता था और पैसे कमाए जाते थे | यह बंदूक उन बतखों का शिकार करने के लिए ही बनाई गई थी| इस गन के एक शॉट में ज्यादा से ज्यादा बतखों को मार दिया जाए इसी हिसाब से यह शिकारी गनफायर करते थे. एक बार एक अमेरिकन शिकारी ने इसकी एक ही शॉट में 90 बतखों को मार गिराया था|

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