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सक्सेस मंत्र -अपने कॉम्पिटिटर को कभी न करें कॉपी

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स्टार्टअप शुरू करने का फैसला लेना एक बड़ा रिस्क है | क्योंकि इसमें सफलता के साथ विफलता भी जुड़ी हुई है | हालांकि जो जोखिम लेना जानता है वही कामयाब हो सकता है | हो सकता है कि उसकी कामयाबी के शिखर तक पहुंचने में ऐसी राहों से गुजरना पड़ेगा जो हर वक्त उसके विश्वास को कमजोर करने की कोशिश करें | लेकिन अगर वह दृढ़ निश्चय ही है तो कोई भी बाधा उसकी राह नहीं रोक सकती | वर्ष 2007 में एक स्टार्टअप के तौर पर शुरू होने वाली मल्टीनेशनल कंपनी इनमोबी की राहें आसान नहीं थी | क्योंकि पहले इंवेस्टर्स जुटाना आसान नहीं था, फिर विदेशी इनवेस्टर को यह समझना की भारत में भी अच्छे प्रोडक्ट्स डेवलप किए जा सकते हैं |
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कंपनी के फाउंडर और सीईओ नवीन तिवारी के लिए शुरुआती दौर में यह बड़ी चुनौतियां थी | नवीन के पिता IIT कानपुर के डीन थे | वही ग्रैंड मदर IIT की पहली महिला प्रोसेसर रह चुकी थी | नवीन ने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली, फिर उन्होंने हावर्ड बिजनेस स्कूल में MBA में एडमिशन ले लिया | वहां वह एंटरप्रेन्योरशिप के लिए काफी प्रेरित हुए इसे इसी दौरान उन्हें अपने बिजनेस स्कूल के साथियों के लिए भारत की ट्रिप आयोजित करने का मौका मिला | इस ट्रिप के बीच उन्हें मोबाइल डील्स और मोबाइल सर्च से जुड़ा इंटरप्योर सिल्क आईडिया आया |
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फिर उन्होंने इसे इंप्लीमेंट करने में पूरा जोर लगा दिया | उनका कहना है कि उनकी सफलता का एक मुख्य कारण यह है कि उन्होंने कभी उस चीज को कॉपी नहीं किया जो उनके प्रतिस्पर्धी या उनके कॉन्पिटिटर कर रहे थे | वह कहते हैं उन्होंने अपने हीरोज से काफी कुछ सीखा | उन्होंने अपने पिता को अपने सपनों और लक्ष्य को पूरा करने के लिए मेहनत करते देखा था | वहीं दूसरे हीरो सचिन तेंदुलकर से कमिटमेंट सिक्योरिटी और फॉर्मेलिटी से काफी इंस्पायर्ड हुए | नवीन के आईडिया, हार्डकोर, और  डिटरमिनेशन का ही नतीजा है कि आज वह दुनिया के कामयाब बिज़नेस पर्सनालिटीज में शामिल है |

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