5 ऐसे सवाल जो विज्ञान को खामोश कर देते हैं!

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हेलो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, दोस्तों यह कहना सच होगा कि हम इंसानों ने हमारी दुनिया को जादुई दुनिया बना दिया है. आज हवाई जहाजों की मदद से हम आसमान में बिना पंख के उड़ सकते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि हम अंतरिक्ष तक पहुंच रखते हैं जहां तक हमारी पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण भी नहीं पहुंच पाता है. एयर कंडीशनर और फ्रिज की मदद से हमने मौसम पर भी कंट्रोल करना सीख लिया है. हम सूर्य की गैरमौजूदगी में भी रात को अपने घर को रोशन रख सकते हैं और समुंद्र में कई सौ मीटर की गहराई में जाकर मछलियों की गोते लगा सकते हैं. लेकिन दोस्तों फिर भी हमारी दुनिया में ऐसी बहुत सी साधारण सी चीज या घटनाएं मौजूद हैं जिन्हें हम आज तक समझ नहीं पाए हैं. आज मैं आपको ऐसी ही 5 साधारण-सी घटनाओं के बारे में बताने वाला हूं जिनका साइंस के पास कोई जवाब नहीं है.

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5 questions that science can not answer

5. हमें सपने क्यों आते हैं

सपने आना बेहद ही साधारण सी बात है. हम सभी को सपने आते हैं, सपने ज्यादातर डरावने होते हैं और कई बार तो बेहद अजीब होते हैं. विज्ञान कहता है कि जो हम दिन भर में सोचते हैं, देखते हैं वही हमें सपनों में दिखाई देता है. लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है. कई बार आपके साथ ऐसा हुआ होगा कि रात को आपने सपने में कोई घटना देखी और वही घटना अगले दिन आपके साथ घटित हो जाती है. जब हम सपने देखते हैं तो हमारी आंखों की गति तेज हो जाती है. मस्तिष्क से पैदा होने वाली तरंगों की बनावट में अंतर आता है.

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शरीर में कुछ रासायनिक परिवर्तन होने लगते हैं. इन सभी परिवर्तनों के अध्ययन से निश्चित है कि सपने दिखाई देने का अपना ही एक अलग महत्व है. विज्ञान का ऐसा भी मानना है कि जब हम सो जाते हैं तो भी हमारे दिमाग का कुछ हिस्सा जागता रहता है और सोचता रहता है और हमे अपने दिमाग की उसी हिस्से की वजह से सपने आते हैं. लेकिन आज तक कोई भी वैज्ञानिक ठीक से यह पता नहीं लगा पाया कि नींद में हमारा दिमाग किस तरह से काम करता है और हमें बिल्कुल वास्तविक लगने वाले सपने क्यों आते हैं.

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4. हमारे सौर मंडल में कितने ग्रह हैं

पहले कहां जाता था कि हमारे सौर मंडल में 9 ग्रह हैं लेकिन ग्रहों की गिनती से प्लूटो को बाहर निकाल दिया गया. तो अब आपको क्या लगता है हमारे सौर मंडल में कितने ग्रह हैं. 8 या फिर 7 ? जी हां कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि शुक्र ग्रह कोई ग्रह नहीं है बल्कि नष्ट हो चुका तारा है. यह हमारे सौरमंडल का हिस्सा नहीं है. बल्कि कहीं बाहर से आया है. किसी वजह से शुक्र ग्रह की घूमने के दिशा भी बाकी सभी ग्रहों की दिशा से उल्टी और बेहद धीमी है.

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इसके अलावा हमारे सौरमंडल में कम से कम 2 ऐसी ज्ञात शुक्र बेल्ट हैं जिनमे हजारों की संख्या में ग्रह हैं. कई वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना है कि बुध ग्रह और सूर्य के बीच में भी कई सारे प्लेनेट हो सकते हैं. लेकिन सूर्य की तेज चमक के कारण उन्हें देखना नामुमकिन है. सिर्फ इतना ही नहीं प्लूटो से आगे भी कुछ बड़े ग्रह हो सकते हैं लेकिन बहुत ज्यादा दूरी और अंधकार की वजह से खोजें नहीं जा सके हैं. असल में यह कहना कि हमारे सौरमंडल में 8 ग्रह हैं बिल्कुल ही गलत दवा है. हां ऐसा कहा जा सकता है कि हम इंसानों ने अब तक हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह खोज निकाले हैं.

3. चेतना क्या है

यदि आप यह आर्टिकल पढ़ रहे हैं तो आपके अंदर चेतना है. लेकिन अगर आप के सर में कोई पत्थर मारकर आप को बेहोश कर दें तो कुछ समय के लिए आपके सोचने, समझने, देखने और सुनने आदि की शक्ति खत्म हो जाएगी. लेकिन जैसे ही आप कोमा से बहार आएंगे आप फिर से सब कुछ देख पाएंगे, सुन पाएंगे, सोच पाएंगे ,समझ पाएंगे | अब सवाल यह है कि जब कोई व्यक्ति बेहोश होता है तो तब भी उसका दिल धड़क रहा होता है . वह सांस ले रहा होता है, शरीर में खून भी बह रहा होता है. लेकिन फिर भी उसके सोचने और समझने की शक्ति आखिर कैसे चली गई.

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सोचने, समझने और महसूस करने की इसी शक्ति को चेतना कहा जाता है. आप इसे आत्मा भी कह सकते हैं. अगर आप किसी कोमा में जा चुके मरीज से मिलोगे तो जानोगे कि वह इंसान जिंदा तो है लेकिन उसके अंदर की चेतना खत्म हो चुकी है. तो क्या जीते जी उसके शरीर से आत्मा निकल कर जा चुकी हैं? असल में चेतना का सीधा संबंध दिमाग से होता है. ज्यादातर वैज्ञानिकों का मानना है कि चेतना दिमाग के अंदर घटित होती केमिकल प्रोसेसिंग से ही उत्पन्न होने वाली ऊर्जा होती है. किंतु विज्ञान का नियम है की ऊर्जा को ना बनाया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है. तो आखिर दिमाग में चेतना आती कहां से हैं. और इंसान के मरने के बाद वह चेतना कहां चली जाती है. इस सवाल का जवाब वैज्ञानिक आज तक नहीं ढूंढ पाए है|

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2. क्या हम ब्रह्मांड में अकेले इंसान हैं

आप सभी को पता है कि हमारा ब्रह्मांड कितना विशाल है लेकिन क्या इस पूरे ब्रह्मांड में एकेला एक पृथ्वी ही ऐसा ग्रह जहां जीवन मौजूद है या फिर पृथ्वी के बाहर भी कहीं जीवन मौजूद है . अगर हां, तो वहां किस प्रकार के जीव मौजूद हैं. इस बारे में वैज्ञानिकों ठीक से कुछ भी नहीं पता है. अन्य ग्रहों का जीवन हमारे जीवन से बेहतरीन हो सकता है, हो सकता है कि किसी ग्रह पर रहने वाले जीव ऐसे पदार्थ और तत्वों से भिन्न हो जो इस पृथ्वी पर रहने वाले जीवों से एकदम भिन्न है. हो सकता है उनके जीवन की आवश्यकताएं ऐसी हो जिनमें हमारा जीवन संभव ही ना हो| उन्हें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की ज़रूरत ना पड़ती हो, या फिर उन्हें सांस लेने की ही जरूरत ना हो और हम मान बैठे हैं कि बिना प्रयाप्त ऑक्सीजन के जीवन संभव नहीं है.

अब आप जरा सोचिए की अगर हमारी पृथ्वी में समुंद्र के पानी में कोई जीव नहीं होता तो निश्चित ही हमारा दावा होता कि पानी में जीवन संभव नहीं है. क्योंकि पानी में सांस नहीं लिया जा सकता. लेकिन पानी में रहने वाले जीव यह साबित करते हैं कि हर जीव के जिंदा रहने की परिस्थितियां अलग अलग होती हैं. वैज्ञानिक कहते हैं कि मंगल ग्रह पर पानी मौजूद है लेकिन वहां जीवन नहीं हो सकता क्योंकि उस पानी मीथेन बहुत बड़ी मात्रा में है. लेकिन क्या ऐसा संभव नहीं है कि वहां ऐसे जीव रहते हैं जिन्हें जीने के लिए ऑक्सीजन नहीं बल्कि मीथेन की की जरूरत पड़ती हो और वहां मौजूद वैज्ञानिक हमारे ग्रह के बारे में दावा करते हैं कि पृथ्वी पर पानी तो है लेकिन जीवन नहीं हो सकता क्योंकि पृथ्वी के पानी में पर्याप्त मात्रा में मीथेन नहीं है.

1. इंसानों के ब्लड ग्रुप अलग अलग क्यों होते हैं

क्या आपको अपना ब्लड ग्रुप पता है? अगर नहीं तो आप किसी भी पैथोलॉजी लैब में जाकर आसानी से अपने ब्लड ग्रुप की जांच करवा सकते हैं. लेकिन आप किसी भी लेब या डॉक्टर से यह नहीं पता कर सकते कि ब्लड ग्रुप अलग अलग क्यों होते हैं और उनका क्या फायदा है. ब्लड ग्रुप मुख्यतः आठ प्रकार के होते हैं. केवल समान ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों को ही खून की अदला-बदली हो सकती हैं .सबसे पहले 1908 में ब्लड ग्रुप की जानकारी हुई. उसके बाद से लेकर आज तक इस बारे में कई रोचक जानकारीयो का पता चला हैं.

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कमाल की बात तो यह है कि ब्लड ग्रुप के अलग-अलग प्रकार एक समान रूप में नहीं पाए जाते हैं. ए पॉजिटिव और ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप काफी सामान्य होता है और करीब 70% आदमी इन्हीं दो ब्लड ग्रुप के होते हैं. वही ए बी नेगेटिव ब्लड ग्रुप बहुत ही दुर्लभ होता है और यह ब्लड ग्रुपं 100 में से एक आदमी का ही होता है. इसके अलावा अभी कुछ व्यक्तियों में ऐसे भी ब्लड ग्रुप खोजे जा चुके हैं जो किसी दूसरे ग्रुप से मेल नहीं खाते हैं. अभी हाल ही में गुजरात के एक शख्स में एक नए ब्लड टाइप का पता चला है. जिसका नाम INAR रखा गया है. अभी तक दुनिया भर में करीब 12 ऐसे ब्लड ग्रुप मिल चुके हैं जो किसी से मेल नहीं खाते हैं. जाहिर है ऐसे लोगों को खून की जरूरत पड़ने पर खून मिलना नामुमकिन होगा.

दोस्तों आपने अपना बहुत ही कीमती समय देकर मेरा यह आर्टिकल पढ़ा है इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद… आप इस बारे में क्या सोचते है?

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