This creature is alive even after death

मरने के बाद भी जिन्दा रहते है यह जीव! कुछ तो हमरे आस पास ही रहते है

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हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, दोस्तों क्या यह संभव है कि किसी इंसान का शरीर इतना मजबूत हो सकता है कि वह करीब 4 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपनी और आती हुई गोली को हथेली से रोक दे… बिल्कुल नहीं| वास्तव में फिल्मों में दिखाई गई इन बकवासों को दिमाग से निकाल कर अगर हम विज्ञान के नजरिए से देखें तो हम इंसानों का शरीर बेहद नाजुक होता है| हम में से कुछ इतने बहादुर होते हैं कि गोली लगना तो दूर वे शायद गोली की आवाज सुनकर ही बेहोश हो जाए| लेकिन दोस्तों प्रकृति द्वारा बनाए गए करोड़ों-अरबो जीवो में से कुछ जीव इतने सख्त जान होते हैं जिसकी कल्पना ऐसे बकवास सीन सोचने वाले निर्देशक भी नहीं कर सकते ऐसे ही कुछ जीवो के बारे में आज में आपको बतावगा|

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सांप

जब हमारा सामना सांपों से होता है तो हमारी 3 प्रतिक्रिया हो सकती हैं या तो हम चिल्लाने लगते हैं या वहां से भाग जाते हैं या फिर सांप को ही मार डालते हैं| लेकिन शायद आपको यह जानकर अचरज हो के वाईपर या अजगर जैसे सांपों का शरीर मरने के बाद भी अपना बचाव करता रहता है| असल में इन सांपों के माथे पर दो छिद्र पाए जाते हैं जो गर्मी के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं यह छिद्र विभिन्न प्रकार के जीवो के शरीर में से निकलने वाली गर्मी जो कि इंफ्रारेड के रूप में होती है उसे आसानी से महसूस कर लेते हैं| सांपों के शरीर की मांसपेशियों में मरने के घंटों बाद तक ऊर्जा बनी रहती है इसी वजह से मरने के कई घंटे बाद तक यह सांप अपना बचाव करते हैं|

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आप इन सांपों के जिस ओर जाकर खड़े होंगे सांप आपके शरीर की गर्मी को महसूस करेगा और बचने के लिए दूसरी तरफ मुंह कर लेगा वह भी मरा होने के बावजूद. वैसे मरने के बाद सांप द्वारा अपने इस बचाव का उसे कोई फायदा तो नहीं होने वाला लेकिन उसके इस व्यवहार से हमें सावधान होने की जरूरत अवश्य है क्योंकि मरने के बाद सांप सिर्फ अपना बचाव ही नहीं करता बल्कि आपको काट भी सकता है| अगर रैटलस्नेक और गाबोन वाइपर जैसे सांपों का सर धड़ से अलग भी कर दे तो भी इनका सर करीब डेढ़ से 2 घंटे तक बिना धड़ होने के बावजूद हमला करता रहता है| इसलिए इन सांपों को मारने के बाद इन्हें सावधानी से जमीन में गाड़ दिया जाता है क्योंकि इनके मरने के बाद भी इनका काटना किसी भी इंसान की जान ले सकता है. This creature is alive even after death

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कॉकरोच

कॉकरोचों को हिंदी में तिलचट्टा कहा जाता है| माना जाता है कि पृथ्वी पर इनका जन्म कम से कम 30 करोड़ साल पहले हुआ था यानी कि डायनासोरों से भी पहले| यह इतनी सख्त जान है कि अगर भविष्य में कभी परमाणु युद्ध हुआ तो भी कॉकरोच आसानी से बच जाएंगे अगर आप कॉकरोच को फ्रिज में भी रख दे तो खुद की बर्फ जमने के बाद भी यह नहीं मरने वाला| सिर्फ इतना ही नहीं कॉकरोच के गर्दन काट देने के बावजूद भी इसे मरने के लिए कई सप्ताह का समय लग जाएगा. कई सप्ताह बाद भी उसकी मौत वजह यह होगी कि बगैर सिर के यह कुछ खा – पी नहीं सकता इसलिए भूख प्यास के चलते इसकी मौत हो जाती है| कॉकरोचों को बगैर सिर के सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती क्योंकि यह अपने शरीर पर बने छोटे-छोटे छेदों द्वारा सांस लेते हैं|

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कॉकरोच 40 मिनट तक अपनी सांस रोक कर भी रख सकते हैं इसी वजह से वह लगभग 30 मिनट तक पानी में बड़े ही आसानी से रह सकते हैं| कॉकरोचों की 6 टांगे होती हैं हर एक टांग में 3 जोड़ या कहे की 3 घुटने होते हैं अगर किसी कारण से इसकी कोई टांग टूट जाती है तो कुछ ही दिनों में उसकी जगह नई टांग उग जाती है| कॉकरोचों की कुछ ऐसे मादा प्रजातियां भी पाई जाती हैं जो पूरे जीवन काल में सिर्फ एक बार किसी नर से संबंध बनाती है लेकिन सिर्फ एक बार के संबंध से ही यह पूरे जीवन गर्भवती रहती है और समय-समय पर अंडे देती रहती है|

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ऑक्टोपस

ऑक्टोपस एक समुद्री जीव है. यह जीव बेहद लचीला होने के साथ-साथ बेहद ही समझदार होता है| इस जीव को कैद करके रखना बहुत ही मुश्किल काम होता है आप चाहे इसे कैद करने की कितनी भी कोशिश कर ले यह कभी अपने तेज दिमाग का प्रयोग करके तो कभी अपने लचीले शरीर की मदद से हर बार कैद से भाग निकलता है| ऑक्टोपस के पास 3 दिल होते हैं लेकिन इस जीव की सबसे अनोखी खासियत यह होती है कि इसकी 8 भुजाएं इसके एक दिमाग पर निर्भर नहीं होती, बल्कि हर भुजा का अपना ही एक अलग दिमाग होता है| इसी कारण से मरने के बाद भी इसकी भुजाओं में पहले जैसी गति बनी रहती है इसकी इसी खूबी की वजह से जापान में ओडरेडोन नाम से इसकी एक डिश बेहद लोकप्रिय है|

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इसको खाने वाले इस डिश के सवाद से ज्यादा इस में होने वाली हरकत का लुत्फ उठाते हैं क्योंकि जैसे ही मरे हुए ऑक्टोपस पर नमक या सोस डाला जाता है तो इसकी भुजाओं में हरकत आ जाती है और यह तेजी से हिलने लगती है| इसको खाते समय इसकी हलचल को गले में और खाने के बाद पेट में महसूस किया जा सकता है| सुनने में यह बेहद घिनौना लगता है और मेरे लिए तो ऐसा कर पाना नामुमकिन है… क्या आप ऐसा कर सकते है मुझे कमेंट में जरुर बताये|

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सैलामेंडर

सैलामेंडर उभयचरों की प्रजाति का नाम है| उभयचर उन जिवों को कहा जाता है जो मछलियों और सरीसृप वर्गों के बीच के श्रेणी में आते हैं सैलामेंडर की कई प्रजातियों के पास बेहद ही अनुखी खूबियां होती हैं| इन जीवो में अंगों को फिर से बनाने और घाव भरने की अदभुत क्षमता होती है और तो और नए अंग बनने के बाद इस जीव के शरीर पर किसी तरह के निशान भी बाकी नहीं रहते| इसकी रीड की हड्डी दिल या दिमाग में लगे गंभीर से गंभीर चोट भी चंद दिनों में ही ठीक हो जाती है इनकी इसी खूबी की वजह से दुनिया भर के वैज्ञानिक इन पर पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से शोध कर रहे हैं| शोधकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सैलामेंडर्स में किस तरह घाव भरने की प्रक्रिया होती है इसके लिए वे इस जीव के जींस के अनुकरण को समझने की कोशिश कर रहे हैं|

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वैज्ञानिकों ने इस जीव में मौजूद m-block नामक एंजाइम को भी खोज निकाला है जो इसके तेजी से घाव भरने और अंगों के पुन निर्माण की विधि को गति देता है| शोधकर्ताओं द्वारा इस एंजाइम के चूहों पर किए गए प्रयोग भी सफल रहे हैं इसलिए माना जाता है इस की मदद से भविष्य में इंसानों के कटे हुए अंग जैसे हाथ या पैर को दोबारा उगा कर चिकित्सा जगत में नई क्रांति लाई जा सकती है| अगर ऐसा हुआ तो यह एक बहुत ही बड़ी खोज होगी|

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दोस्तों आप ऑक्टोपस और सैलामेंडर के बारे में क्या सोचते है? अपने महत्वपूर्ण विचार हमरे साथ कमेंट में शेयर करे ताकि सब लोग एक दुसरे के विचारो को जान सके|

दोस्तों आर्टिकल लिखने के लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ती है और मेरा काफी समय लग जाता है इसलिए में आपसे एक लाइक और शेयर की उम्मीद करता हूं..

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