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हमारी पृथ्वी इंसानों के बिना कैसी होगी! रोचक जानकारी

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हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, अगर पृथ्वी से अचानक सारे मनुष्य खत्म हो जाएं तो मनुष्य रहित पृथ्वी कैसी होगी? हमारे इंटेलीजेंट वैज्ञानिकों के मन में भी यह सवाल बहुत बार उठाया है और आम आदमी तो इसका जवाब जानने के लिए बहुत उत्सुक हैं. कहने और सुनने में यह सवाल बहुत ही बेतुका लगता है क्योंकि इस वक्त पृथ्वी पर लगभग 750 अरब लोग रहते हैं और एक साथ इतने लोगों का मरना या खत्म हो जाना लगभग नामुमकिन है. लेकिन आज हम एक बार ऐसा मानकर देखते हैं कि पृथ्वी से सारे इंसान अचानक खत्म हो जाए तो पृथ्वी के हालात कैसे होंगे|

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How will earth be without humans

अब हमें याद रखना है कि हमारे इस ख्याल में पृथ्वी से सिर्फ मानव सभ्यता खत्म होने वाली है. मतलब इंसानों के अलावा सभी प्रकार के दूसरे जीव या प्राणी, पशु – पक्षी और तमाम वनस्पति या वस्तुये जस की तस रहेंगे. इस प्रकार के सवाल पर एक हॉलीवुड फिल्म एजेंड भी बन चुकी है. जिसमें अचानक से पृथ्वी के लगभग सारे इंसान खत्म हो जाते हैं.

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How will earth be without humans

आपको जानकर हैरानी होगी कि भूतकाल में पृथ्वी पर एक बार ऐसा पहले हो चुका है. जब संपूर्ण इंसानियत मरने की कगार पर थी. अमेरिका और इजराइल की संयुक्त टीम ने 2008 में किए गए रिसर्च से यह पता लगाया है कि बहुत ही नजदीक के भूतकाल में एक ऐसा भी समय आया था जब मानव सभ्यता लगभग पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर आ गई थी. यह समय आज से लगभग 75 हजार साल पहले आया था.

How will earth be without humans

75 हजार साल पहले इंसानों की संख्या सिर्फ अफ्रीका में ही थी. जहां पर इंसान प्रजाति का जन्म हुआ था. उस समय गुफा वासी आदिमानव की संख्या लाखों में गिनी जा सकती थी. उसी वक्त एक नाजुक समय आया था जब भुखमरी के कारण वह संख्या घटकर सिर्फ 2000 रह गई थी और पूरी दुनिया में इंसान कहने के लिए सिर्फ यही 2000 व्यक्ति थे. क्योंकि इनके अलावा बाकी पूरी पृथ्वी पर कोई और मानव बस्ती नहीं थी. इसलिए उस वक्त इंसानियत का भविष्य सिर्फ उन्हीं 2000 लोगों पर आधारित था.

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अगर उस समय उन दो हजार इंसानों का भी भुखमरी के कारण अंत हो गया होता तो शायद आज आप और मैं इस धरती पर मौजूद नहीं होते| सौभाग्यवश उन 2000 लोगों को जीवनदान मिल गया क्योंकि वह लोग अपने पुराने आवासों को छोड़कर खाने की तलाश में छोटे-छोटे गुट बनाकर चारों ओर निकल पड़े. उनमें से कई गुट हरियाली प्रदेशों में जाकर बसें और उनकी संख्या बढ़ने लगी | लगभग 10000 वर्ष बाद यानी कि आज से लगभग 65000 साल पहले उनमें से कई लोग मध्य और उत्तर अफ्रीका को छोड़कर यूरोप और एशिया में जाकर बसें और इस प्रकार धीरे-धीरे इंसानों का पूरे विश्व में बसेरा हो गया|

अब आप मान लो कि इतने सालों बाद एक बार फिर इंसानों पर किसी घातक वायरस या बैक्टीरिया का हमला हो जाता है या फिर किसी और वजह से सिर्फ और सिर्फ इंसान प्रजाति का खात्मा हो जाता है तो उस परिस्थिति में यह धरती कैसी होगी? इस सवाल के जवाब हम विज्ञान की नज़र से जानते हैं.

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धरती से इंसानियत के खात्मे के बाद लगभग 24 से 48 घंटे में उसका पहला पता पृथ्वी के चक्कर लगाने वाले सैटेलाइट को चलेगा. सामान्य हालातों ने रात के समय अमेरिका का 62 प्रतिशत आकाश रोशनी से चमकता रहता है. इसी प्रकार यूरोप का लगभग 85% आकाश रोशनी से चमकता रहता है, जापान का 58 प्रतिशत आकाश रोशन रहता है. इंसानियत के खत्म होने के 24 घंटे बाद पूरी पृथ्वी पर अंधेरा अपना साम्राज्य फैलाने लगेगा. क्योंकि सभी प्रकार के पावर स्टेशन ठप पड़ जाएंगे.

कुछ घंटों बाद सभी प्रकार के ऊर्जा संयंत्रों के बंद होने के बाद धीरे-धीरे सभी प्रकार की रोशनी करने वाले यंत्र बंद हो जाएंगे और इसका पता सबसे पहले धरती का चक्कर लगाने वाले सेटेलाइट को चलेगा और पूरी पृथ्वी अंधकार में डूब जाएगी. अब पावर का कटआउट अपना खतरनाक असर दिखाना शुरू करेगा. दुनिया में कुल मिलाकर 435 न्यूक्लियर स्टेशन हैं. इन न्यूक्लियर स्टेशन के राक्षसों को शांत रखने के लिए कूलिंग टावर में पानी की जरूरत पड़ती है. पानी को उपर चढ़ाने के लिए पंप की जरूरत पड़ती है और पम्प चलाने के लिए पावर की जरूरत पड़ती है. इसलिए बिना बिजली के न्यूक्लियर स्टेशन का टेंपरेचर अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएगा|

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यूरेनियम पिगल कर आग पकड़ लेगा और न्यूक्लीयर स्टेशन की छत को फाड़ कर बाहर आने लगेगा. इन केमिकल्स का खतरनाक बादल बनकर चारों ओर घूमने लगेगा. लगभग 7 दिन बाद दुनिया के सभी छोटे बड़े शहरों से रोज के लाखो टन पानी को धरती से निकालने वाली मानव जाति अब नहीं रहेंगे परिणाम स्वरुप पृथ्वी के नीचे मौजूद ग्राउंड लेवल का पानी ऊपर चढ़ने लगेगा और इस प्रकार से पानी ऊपर चढ़ने की वजह से धरातल में मौजूद चूहे बाहर आने लगते हैं. इन चूहों के झुंड शहरों में मौजूद मॉल्स और खाने लायक सामान को धीरे-धीरे करके खत्म कर देंगे. इनको खाने में भरपूर मात्रा में मिलेगा तो इनकी प्रजनन करने की क्षमता भी बढ़ जाएगी और इनकी जनसंख्या बहुत तेज गति से लाखों में बढ़ने लगेगी और सूमशान शहरों के चारों और मनुष्य के स्थान पर चूहों का राज होगा|

लगभग 1 महीने बाद विमान, मोटर कार और फैक्ट्रियां अब अपनी धूम्रपान करने की आदत को छोड़ चुके होंगे. इसलिए अब वातावरण धीरे-धीरे शुद्ध होने लगता है. अब वातावरण से कार्बन धीरे-धीरे खत्म होने लगता है. जिससे पूरा प्रियावर्ण साफ नजर आने लगेगा| तीन चार महीने बाद आकाश इतना शुद्ध हो जाएगा कि कई सारे तारे और आकाशीय पिंडों के प्रकाश को पृथ्वी से सीधे देखा जा सकता है लेकिन अफसोस अब इस प्रकाश या फिर इस प्रकार की चीजों को देखने के लिए अब कोई इंसान जिंदा नहीं होगा |

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लगभग 1 साल बाद सीमेंट और कंक्रीट से बनी बड़ी बड़ी बिल्डिंग वृक्षों ,आंधी तूफान, बारिश और जंगलों के सामने ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाएंगे. आधुनिक मकानों को अब मेंटेन करने वाला कोई नहीं रहा इसलिए पीपल जैसे पेड़ अपनी जबरदस्त जड़ों की ताकत से धीरे-धीरे इन सभी बिल्डिंगों को धराशाई कर देंगे| जब सभी प्रकार के मकान और बिल्डिंग टूटकर मिट्टी बन जाएंगे तो धीरे-धीरे इनमें घास या दूसरे पेड़ पौधे उगने लगेंगे | इस प्रकार के हालात लगभग पूरी पृथ्वी पर बन जाएंगे.

मानव जाति के खत्म होने के लगभग 10 साल बाद पूरी पृथ्वी पर जंगल राज होगा. हर जगह पेड़ पौधे नजर आने लगेंगे जहां पर पहले कभी बड़े बड़े मॉल या सीटियां या फिर चमचमाते फर्श हुआ करते थे वहां पर भी आप जंगल और नदियां नजर आने लगेंगे लेकिन इन्हें देखने वाला भी कोई नहीं होगा | अब शहरों में भी खतरनाक जंगली जानवर अपना बसेरा बनाने लग जाएंगे. अब यहां पर शेर, चीता, हिरन, बाघ, भालू, भेड़िए इस प्रकार के तमाम प्रकार के जानवर नजर आने लगेंगे | मनुष्य के खत्म होने के कारण अब समुंद्र भी फलने फूलने लगेंगे.

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अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार इंसानो ने कोर्ट्स नामक एक मछली की प्रजाति का इतना शिकार किया कि उसकी 95% संख्या खत्म हो गई. अब जब इंसान नहीं रहा पृथ्वी पर तो सभी प्रकार के जीव – जंतु, मछलियां या समुद्री जीव अपना विकास तेजी से करने लगेंगे. लगभग 100 साल बाद पृथ्वी को देख कर कोई भी यह नहीं कर पाएगा कि यहां पर कभी इंसान रहा करते थे. क्योंकि अब प्रथ्वी पर पूर्ण रुप से जंगल फैल चुका होगा. मजबूत से मजबूत मकान और हर प्रकार की गाड़ी या लोहे से बने तमाम प्रकार के सामान जंगल में दफ़न हो चुके होंगे.

इंसानों के खत्म होने के लगभग 500 साल बाद अब पूर्ण रूप से शहरों का अस्तित्व ख़त्म हो गया है. लेकिन पत्थरों के बने कुछ ढांचे अभी भी नजर आ सकते हैं. दूसरी तरफ इंसानों ने जिन जानवरों को पाल पोस कर अपना पालतू बनाया था अब वह सब भी जंगली हो चुके होंगे. अब फिल्मों में दिखाए जाने वाले जानवर फिर से पनपने लगेंगे और नई नई प्रजातियां उत्पन्न होने लगेगी. लगभग 1000 साल बाद पृथ्वी के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का नामोनिशान नहीं रहेगा. अब लगभग 99% कार्बन डाइऑक्साइड बारिश के माध्यम से समुद्र में जा चुका होगा | अब समुद्र के तटों पर कार्बनिक खडों की रचना होने लगेगी. अब फिर से वातावरण में नहीं बोलेंगे पृथ्वी का वातावरण बहुत ज्यादा साफ हो चुका होगा|

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लगभग 10000 साल बाद कार्बन डाइऑक्साइड पूर्ण रूप से खत्म हो जाने के बाद धरती पर ग्लोबल वॉर्मिंग के असर की कोई संभावना ही नहीं रही ग्रीन हाउस इफेक्ट होने लगा है और धरती का तापमान औसत 2.5 डिग्री कम हो चुका होगा और हिम युग की शुरुआत होने लगेगी. अब धीरे-धीरे पृथ्वी पर हर जगह बर्फीले चादरे देखने को मिलेंगे. लगभग 50000 साल बाद न्यूक्लियर स्टेशनों का कचरा जो मानव सभ्यता में जमीन के अंदर में दफनाया था उसके खतरनाक साइड इफेक्ट अब खत्म हो चुके होंगे. अब पृथ्वी पर मौजूद मानव सभ्यता का हर एक प्रमाण नष्ट हो जाएगा.

लगभग 10 करोड़ वर्ष पश्चात उत्क्रांती के विकास में आगे बढ़ने की ओर मानव सभ्यता का स्थान लेने की दूसरे जिवो में होड़ मची है. इसमें सबसे ऊपर स्थान बंदर या चिंपांजी का है. बंदर और मनुष्य का जेनेटिक ब्लू प्रिंट लगभग 98% मिलता है. अब करोड़ों साल के विकास के बाद हो सकता है चिंपांजी इस दो पर्सेंट के गैप को खत्म कर दें और इंसानों का रूप लेने लगे.

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अब पहले वाले मनुष्यों का तो पृथ्वी पर एक भी चिन्न रहा नहीं. इतने सालों से हुए कटाव और निर्माण में पृथ्वी पर कभी मानव अस्तित्व था उसके सारे चिन्न मिटा गए हैं. चंद्रमा पर भी इंसानों के मौजूद चिन्न पूर्ण रुप से मिट चुके होंगे. पृथ्वी पर कभी हाईटेक मानव जाति राज कर चुकी है उसके निशानों में अब सिर्फ एक निसान टाइम कैप्सूल बाकी रह जाता है.

मिश्र धातु की बनी हुई और 0 अवकाश वाली टाइम कैप्सूल में मानव जात का संपूर्ण माहिती भंडार हैं. अमेरिका सहित कई सारे देशों ने अपने द्वारा लिखित इतिहास को लिखकर टाइम में डालकर भूगर्भ में दफना दिया है. अब इस टाइम कैप्सूल की तुलना डायनासोर के अवशेषों के साथ कर सकते हैं 19वीं सदी में जब डायनासोर के अवशेष मिले थे तब मानव सभ्यता ने जाना था कि पृथ्वी पर सबसे पहले शासन उसका नहीं है बल्कि डायनासोरों का था.

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अरबो बरसों के उतार चढ़ाव के बाद चिंपांजी के मानव रूप में परिवर्तन होने के बाद वह धीरे-धीरे अपने आप को शिक्षित करके सेंसिटिव मेटल डिटेक्टर से अक आद टाइम खूबसूरत खोज निकाले इसकी कितनी संभावना है इसके बारे में कुछ कहा नही जा सकता है. अगर उनको कैप्सूल मिल जाए तो उसमें मौजूद डाटा उन्हें बता देगा कि भूतकाल में लगभग 1000000 सालों तक इंसान ने पृथ्वी पर राज किया था. लेकिन दुर्भाग्य से टाइम कैप्सूल मिलने के चांस 0 के बराबर हैं. भले ही टाइम कैप्सूल कितने ही मजबूत क्यू ना हो लेकिन अरबो सालों के बाद भी वह बने रहे इस बात की कोई गारंटी नहीं है. एक बार आप मान लो अगर वह अपनी मूल हालत में एक्टिव रह भी गए फिर भी जरूरी नहीं कि वह आने वाले इंसानो को मिल ही जाए क्योंकि पृथ्वी में लगातार भूचाल आते रहते हैं इस वजह से वह अपना स्थान बदल कर कहीं और भी जा सकते हैं.

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दोस्तों आपको क्या लगता है हमारे बाद आने वाले कोई इंसान प्रजाति क्या हमारे अवशेषों का पता लगा पाएगी… अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं…

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