यह पांच विलुप्त हुए जीव एक बार फिर इस धरती पर लेंगे जन्म!

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हेल्लो दोस्तों मेरा नाम अनिल पायल है, दोस्तों माना जाता है कि हमारी पृथ्वी साढे़ चार अरब साल पुरानी है| पृथ्वी के इतने लंबे जीवन काल में समय-समय पर करोड़ों जीवों की प्रजातियों ने जन्म लिया है उनमें से कुछ प्रजातियां आज भी जीवित हैं जबकि अनेको ऐसी भी हैं जो वर्तमान समय में विलुप्त हो चुकी है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि लुप्त हुए उन जीवो को हम कभी नहीं देख पाएंगे| आज विज्ञान बहुत आगे बढ़ चुका है और बॉयोजेनेटिक से जुड़े कुछ वैज्ञानिकों को यकीन है कि वो आने वाले कुछ सालों में ही विलुप्त हो चुके जीवो को धरती पर दोबारा ला पाएंगे| बर्फ में दबे इन जीवो के संरक्षित उत्तकको से हासिल संरक्षिक पदार्थों को उनके परिवार के दूसरे जीवित सदस्यों के अंडों के साथ मिलाकर उनकी क्लाेनिंग की जा सकेगी|

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अगर यह बात आपको गलत लगती है तो मैं आपको बता दूं कि वर्ष 2009 में रिसर्चरो ने एक लुप्त हो चुकी हिरण की प्रजाति की क्लोनिंग की थी और उसे पहाड़ी बकरी के अंडे में निषेचित करके सफलतापूर्वक प्रजनन भी करवाया था| लेकिन बकरी से पैदा हुआ वह बच्चा 10 मिनट से ज्यादा जीवित ना रह सका| लेकिन अब वैज्ञानिक ज्यादा बेहतर तकनीक के जरिए इन प्रयोगों को अंजाम दे रहे हैं जिसे अब कई जिवों की प्रजातियों को दोबारा पैदा किए जाने की उम्मीद जागी है लेकिन अगर आप यह सोच कर रोमांचित हो रहे हैं कि डायनासोर फिर से नजर आने लगेंगे तो आप गलत हैं| जिन  प्रजातियां को दोबारा वजूद में लाने पर विचार हो रहा है उनमें डायनासोर नहीं है इसकी वजह यह है कि उन्हें लुप्त हुए बेहद ज्यादा वक्त गुजर चुका है और उनके डीएनए भी विकृत हो चुके हैं. endangered animals

यह पांच जीव दोबारा लेंगे जन्म

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 1. यूनिकॉर्न 

हॉलीवुड की फिल्मों में यूनिकॉर्न को एक चमचमाते सफेद घोड़े के रूप में दिखाया जाता है. कई बार तो इसे खूबसूरत पंखों के साथ आसमान में उड़ते हुए भी दिखाया जाता है लेकिन असल में यूनिकॉर्न का यह रूप सिर्फ काल्पनिक है| यह जीव रूस के बेहद ठंडे हिस्से साइबेरिया में पाया जाता था और घोड़े नहीं बल्कि गेंडे के परिवार से संबंध रखता था| इसके सर के ऊपर गेंडे के समान ही सिंग होता था लेकिन गेंडे की तुलना में इसका सिंग 3 गुना ज्यादा बड़ा होता था अपने इसी अकेले और बड़े सिंग के कारण ही इसे यूनिकॉर्न नाम मिला है. यह जीव सिर्फ 25000 साल पहले ही लुप्त हुआ था इसलिए आज भी बर्फ में दबी इसकी हड्डियां और सेल्स बेहद अच्छी हालात में मौजूद है जहां से इसका डीएनए लेकर उसे भारतीय मादा गैंडे में निशेचित करके दोबारा इस शानदार जीव को जन्म दिया जा सकता है|

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2. मैमथ

यह एक विशालकाय हाथी था जो मात्र 10000 साल पहले पृथ्वी पर हम इंसानों के बढ़ते साम्राज्य के कारण विलुप्त हो गया था| यद्यपि इसका वजन आज के अफ्रीकी हाथी के बराबर ही होता था लेकिन गर्दन और सर ऊंचा और दांत बेहद बड़े होते थे| इसके दांत करीब 15 फीट तक लंबे हो जाते थे जिससे यह बेहद खौफनाक लगता था| आज के हाथी की तुलना में मैमथ ज्यादा चुस्त और फुर्तीला भी होते थे. बर्फ में दबे इसके शव आज भी इतने सुरक्षित हैं कि उनसे दांत निकाल कर आज भी व्यापार के प्रयोग में लाए जाते हैं| इतनी अच्छी हालत में मौजूद इन शवों के कारण ही इस जीव को वर्तमान समय में मादा एशियाई हाथी के द्वारा दोबारा प्रजनन करके पैदा करने की सबसे अच्छी संभावना जताई जा रही है|

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3. सेबर दंत शेर

बिल्ली परिवार से संबंध रखने वाला यह जीव प्रकृति की बेहद शानदार रचना कहा जा सकता था| इसे विलुप्त हुए भी लगभग 10000 साल ही हुए हैं और इसके शव भी  मैमथ की भांति काफी अच्छी हालात में मिलते रहे हैं| जिनसे इसके सेल्श लेकर इस शेर के पुनरुत्थान की प्रबल संभावना है. यह शेर बेहद खूंखार शिकारी था, जिस समय हमारे पूर्वज जंगलों में रहा करते थे उस समय इसका खौफ उनके दिलों दिमाग में छाया रहता होगा| इसलिए अगर कभी हम अतीत में जा सके और हमारे पूर्वजों से इस जीव को जिंदा करने के बाबत साला मशवरा कर सके तो वे कतई इस जीव को जिंदा कराने के पक्ष में नहीं होंगे| इसके केनाइन दातों की लंबाई 1 फीट तक होती थी इसकी तुलना में वर्तमान शेर के कैनाइन दांत सिर्फ 4 इंच ही लंबे होते हैं यह 500 किलो वजनी हो जाता था और एक बड़े हाथी तक को मार गिराने का दम रखता था|

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4. डोडो 

डोडो एक बेहद मासूम और बेचारा सा दिखने वाला परिंदा था| इसे लुप्त हुए सिर्फ 350 साल ही हुए हैं यह सिर्फ हिंद महासागर के मॉरिशस द्वीप पर ही पाया जाता था| इसका वजन 20 किलो तक होता था| लेकिन टांगे और पंख बेहद छोटे होते थे जिसके कारण यह उड़ नहीं पाता था और ना ही ठीक से चल पाता था| रंग-बिरंगे डोडो झुंड में लुढ़कते गिरते चलते थे तो स्थानीय लोगों का मनोरंजन होता था| इसलिए कहा जाता है कि इसे भारत में मुगल सम्राटों द्वारा भी मॉरिशस द्वीप से आयात करवा कर पाला जाता था| डोडो शब्द की उत्पत्ति पुर्तगाली शब्द दोदो से हुई है जिसका अर्थ मूर्ख या बावला होता है| सबसे पहले डच लोग जब मॉरिशस पहुंचे तो उन्होंने बड़े पैमाने पर खाने के लिए इस पक्षी का शिकार करना शुरू कर दिया| जिसके कारण जल्द ही यह जीव विलुप्त हो गया| अब डोडो सिर्फ मॉरिशस के राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में ही दिखता है और वहां की सरकार इस परिंदे की पुनः प्राप्ति के लिए बेहद प्रयत्नशील भी है|

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5. निएंडरथल 

आपको पता ही होगा कि चिंपांजी और गोरिल्ला का डीएनए इंसानों से बेहद मिलता-जुलता है लेकिन आज से 40000 साल पहले तक एक और वानर निएंडरथल भी इस धरती पर पाए जाते थे इनका डीएनए और शारीरिक बनावट चिंपांजी और गोरिल्ला की तुलना में बहुत ही अधिक इंसानों से मिलती थी इसी वजह से कुछ वैज्ञानिक तो इन्हें हमारा पूर्वज ही बतलाते हैं| माना जाता है कि निएंडरथल बेहद समझदार होते थे| यूरोप के कई गुफाओं में इनके इंसानों के साथ बेहतरीन संबंध होने के सबूत भी मिलते रहे हैं. हिम युग की शुरुआत में यह प्रजाति बदलते मौसम का सामना नहीं कर पाई और विलुप्त हो गई| लेकिन आज वैज्ञानिकों का मानना है कि बॉयोजेनेटिक्स और क्लाेनिंग तकनीकों से इस प्रजाति की भी स्थापना की जा सकती है| हालांकि लुप्त हुए जिवों कि पुनः स्थापना के प्रयोग नैतिक दृष्टि से कितने ठीक हैं इस बारे में विचार किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि किसी भी जीव की उत्पत्ति या अंत के कुछ कारण होते हैं और उन्हें दोबारा जीवित करके प्रकृति के संतुलन के साथ छेड़छाड़ करना किस हद तक ठीक है यह एक बहुत बड़ा सवाल है|

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